पूरे दिन निर्जला ब्रत रखकर भगवान शंकर का पूजा कर पति के दीर्घायु होने कि कामना

Chandauli news : कार्तिक कृष्ण पक्ष के चतुर्थी तिथि के दिन पति कि लम्बी उम्र कि कामना के लिए शुक्रवार को सुहागिन महिलायें पूरे दिन निर्जला उपवास करने के बाद शाम को चन्द्रमा के उदय होने पर उनका दीदार चलनी कि ओट से दीपक कि रौशनी में पहले चाँद फिर पति का कीं। पति भी पत्नियों के इस समर्पण सौंदर्य व सुशील व्यवहार से आहलादित थे। पर्व के एक दिन पूर्व त्यौहार को लेकर खरीदारी करा दिए थे जिससे पूरे दिन त्योहार को लेकर उत्साह रहा।

करवा चौथ की क्या है कहानी: इस त्यौहार का प्रचलन एक साहूकार की बेटी रानी वीरावती की है, जो अपने पति की लंबी उम्र और भलाई के लिए व्रत रखती थी। कथा के अनुसार करवा चौथ का व्रत पहली बार माता गौरी ने भगवान भोलेनाथ के लिए रखा था। एक और कथा करवा नाम की सती स्त्री की है, जिसने मगरमच्छ से अपने पति को बचाने के लिया था। जिसका परिणाम हुआ कि मगरमछ कि चंगुल से पति छूट गया।
करवा चौथ व्रत को लेकर शुक्रवार के दिन भी बाजारों में चहल पहल रहा। कपड़े कि दुकान से लेकर आभूषण, गिफ्ट यहां तक कि माला फूल व बुके कि दुकानों पर भी भीड़ जुटी रही। कोई गुलाब का बुके तो कोई कपड़ा खरीदने में ब्यस्त था। भले ही सरकार जीएसटी घटा कर महंगाई कम करने का दावा कर रही है लेकिन आभूषण कि दुकान पर पहुंचने के बाद बजट गड़बड़ा ही जा रहा था।
शाम को महिलाएं सज धज कर सोलहो श्रृंगार करके इस तरह तैयार थी जैसे कल कि विदाई करके नई नई ससुराल आयी हों। त्यौहार में उपवास होने के बाद भी रात्रि को चन्द्रमा के अर्घ्य के बाद व्रत का पारण करना होता है। इसकि तैयारी सुबह से ही चल रही रही। कई तरह के पकवान बनकर तैयार थे। पति लोग भी पत्नियों के उपवास में सहायक बने हुए थे। जैसे ही अर्घ्य का काम हुआ उनके पारण के लिए ब्यंजन कि तैयार थाली सामने रखकर अपने हाथों से खिलाये।
डिजिटल माध्यम से भी पर्व का निर्वहन : 21वीं शदी के भारत में हर कार्य डिजिटल हो गया। जिसका उपयोग अब धार्मिक कार्यों में भी तेजी के साथ होने लगा। देश के किसी कोने में स्थित ब्यक्ति अपने घरों या किसी भी स्थान पर हो रहे अनुष्ठान में भी लोग संकल्प ले लेते है। करवा में भी डिजिटल का उपयोग हुआ। जिनके पिया परदेश रहे वह उनकी छवि को वीडियो काल पर ही देख कर अपने अनुष्ठान का पारण कर ली।