- मोबाईल कंपनियों ने थोपा था वर्ष का 13 माह, हर कोई कर हो गया था राजी
News desk : वर्ष में 12 महीना होता है लेकिन ब्रिटिश काल से थोपने वाली जो धारणा है उसे लागू करते हुए मोबाईल कम्पनियों ने वर्ष को 13 महीना बना दिया। जिसे लोग बिना किसी विरोध के स्वीकार भी कर लिए। करोड़ो करोड़ रुपया का रिचार्ज लोग कराने लगे। मोबाईल कम्पनियों के इस अराजकता का विरोध ना न्यायपालिका ने किया ना विधायिका। कारण की नेताओं को तो ₹ 365 के रिचार्ज के जगह हजारों रुपया मिलता है। फिर वह क्यों विरोध करेंगे।

लेकिन इसी विधायिका का एक सदस्य राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा में इन सभी कम्पनियों के खिलाफ मुहीम छेड़ा। उन्होंने बकायदे इन कम्पनियों के द्वारा लूट के प्लान को उजागर करते हुये कहा कि इन कम्पनियों ने जबरदस्ती का रिचार्ज प्लान जनता को थोप रहे है। जो इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते है उन्हें भी इंटरनेट प्लान खरीदना पड़ रहा है। यहां तक कि कैलेंडर 30 दिन का होता है लेकिन यह कम्पनियां 28 दिन में महीना समाप्त कर देते है। राज्य सभा सदस्य के कड़े विरोध के बाद कम्पनियों को पीछे हटना पड़ा। अब 30 दिन के प्लान के साथ साथ बिना इंटरनेट वाला भी प्लान भी मिलेगा। प्रीपेड मोबाइल यूज़र्स को रिचार्ज के मामले में ज़्यादा विकल्प देने के मकसद से लाए गए नए 30-दिन के रिचार्ज नियमों का स्वागत किया है और इसे “कम बजट वाले ग्राहकों” की जीत बताया है। 30 दिन की वैलिडिटी वाले इन नए प्लान्स की तारीफ़ करते हुए, जाने-माने सांसद ने कहा कि इन बदलावों से ग्राहकों को ज़्यादा फ़्लेक्सिबिलिटी मिलेगी, जिसमें वे लोग भी शामिल हैं जो मुख्य रूप से अपने फ़ोन का इस्तेमाल वॉइस कॉल और SMS के लिए करते हैं।