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बलुआ थाने के चार चार कारखास, बालू से तेल निकालने में परेशान

थाना प्रभारी पर हत्या खुलासा कराने का भार, कारखासों को पैसा के बंदोबस्त का भार

बालू ढो रहे ट्रैक्टर से हो रही वसूली




Chandauli news : गंगा नदी से वैध- अवैध ढंग से बालू कि ढुलाई चालू हो गयी हैं। जो बालू तस्करों के साथ साथ यहां के थाना के लिए सबसे बड़ा आय का श्रोत बन गया हैं। थाने पर तैनात प्रभारी के चार चार कारखास बालू से जमकर तेल निकाल रहे हैं।
नवंबर माह मे गंगा के जलस्तर में कमी होने के बाद गंगा नदी से बालू व मिट्टी कि खुदाई शुरू हो जाती हैं। जो जून तक बिना किसी रोक टोक के निर्वाध गति से चलता हैं। इसके लिए थाना से लेकर खनन व राजस्व में भेंट चढ़ाना पड़ता हैं। सूत्रों कि माने तो खुदाई का कार्य अवैध रूप में प्रारम्भ हो गया हैं। प्रतिदिन दर्जनों ट्रेक्टर नदी से बालू व मिट्टी लेकर जा रहे हैं।


जो बलुआ व सकलडीहा पुलिस के आय का अच्छा श्रोत हैं। बलुआ में इसके लिए प्रभारी के चार कारखास लगे हैं। क्योकि इन सभी को चकियां से ट्रांसफर होने के बाद थाना प्रभारी विशेष आग्रह कर अपने साथ पोस्टिंग कराये हैं। सूत्रों कि माने तो बिना वर्दी यह चारो कारखासों का एक सूत्रीय कार्य हैं धनागमन करना। इनके किये गए कार्यों कि शिकायत पर प्रभारी भी बाल्टी भर पानी डाल कर इन्हे गंगा से भी स्वच्छ होने का प्रमाण उच्चाधिकारी के यहां देते हैं।
बालू गाड़ी चलने से पूर्व साहब के चार दूत प्रतिदिन चार से पांच नए उम्र के युवकों के ले आते थे। इसके बाद यहां इन सभी को 3/25में भेजनें का दबाव बनाकर प्रति व्यक्ति 10-12 हजार लिया जाता था। हलांकि इन सभी के कारनामें कि चर्चा उच्चाधिकारी तक हो गयी। जहाँ से पूछ ताछ शुरू हो गया। जिसके बाद बड़े ही साफगोई से प्रभारी ने इन सभी को बचा ले गए। अब मामला संज्ञान में होने के कारण उक्त कार्य पर थोड़ा विराम लग गया।
लेकिन शेर के मुंह खून लगने वाली स्थिति के यह चारो कारखास पैसा के बिना एक दिन भी रह नहीं पाते। तब तक बालू लदे ट्रेक्टर वाले इनके निगाह से गुजरे। फिर क्या था बिन मांगे मुराद मिल गया। अब थाने पर एक से दो ट्रेक्टर इनके द्वारा खड़ा करा दिया जा रहा। फिर शुरू होता हैं लेन देन का खेल। 1 लाख से बोली शुरू होती हैं। जो 30 हजार पर आते आते मामला सेट होता हैं। वाहन स्वामी ने नाम न छापने के शर्त पर बताया कि इस कार्य में लगे जलभरन, रोहित यादव, दीपचंद गिरी प्रतिदिन किसी न किसी मालिक के दो वाहन थाने के पीछे खड़ा करा लेते हैं। जिसे ज़ब तक मामला सेट नहीं हो जाता तब तक छोड़ते नहीं। उन्होंने बताया कि पैसा यह सब सीधे अपने हाथ न लेकर इनके सेट चाय के दुकान पर पैसा रखा जाता हैं उसके बाद गाड़ी छोडी जाती हैं। उच्चाधिकारीयों से शिकायत न करने पर यह सब कहते हैं कि उसके बाद पुरे साल पुलिस ट्रेक्टर चलने ही नहीं देती। पिछले वर्ष लिखित शिकायत पर दो लोंगो पर कार्यवाही हो गयी थी। लेकिन उनके वाहन को केवल पुलिस पुरे वर्ष चलने नहीं दिया।

मृत्युंजय सिंह

मैं मृत्युंजय सिंह पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र में विभिन्न राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त न्यूज़ सम्प्रेषण के डिजिटल माध्यम से जुडा हूँ.मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की ख़बरों को प्रमुखता से उठाना एवं न्याय दिलाना है.जिसमे आप सभी का सहयोग प्रार्थनीय है.

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