- मुगलसराय प्रशासन ने जब दिखाया कागजात टो बंगले झाकने लगे याचिकर्ता
- सरकार कि तरफ से अपर महाधिवक्ता ने रखा पक्ष, एक झटके के कोर्ट ने ख़ारिज कर दी याचिका

Chandauli news : झूट पर उस के भरोसा कर लिया
धूप इतनी थी कि साया कर लिया – शारिक़ कैफ़ी कि यह चंद लाईन मुगलसराय में अतिक्रमण किये लोंगो पर सटीक बैठ रही है। 23 अतिक्रमण कारियों ने झूठा दस्तावेज लगा कर हाईकोर्ट को गुमराह कर दिया। उन सभी के बात पर यकीन कर कोर्ट ने तीन दिन का स्टे ऑर्डर दे दिया। हाईकोर्ट से स्टे ऑर्डर मिलते ही ऐसा प्रचार हुआ कि मानो अब सरकार को उल्टे मुआवजा देना पड़ेगा। लेकिन कहा गया है जब झूठ कि बुनियान पर बने मकान या रिश्ते का भविष्य नहीं होता।
25 मई को हाईकोर्ट के आदेश पर जो जवाब मुगलसराय प्रशासन ने तैयार किया था। उसको देखते ही एक झटके में हाईकोर्ट ने याचिकर्ताओं के याचिका को ख़ारिज कर दिया। दरसल 23 याचियों ने कोर्ट को गुमराह करते हुए कहा कि गाटा संख्या 38/1 जो बैनामा लिए है। उसे भी पीडब्लू डी अपना बताकर निर्माण को ढहा रही है। इसपर हाईकोर्ट ने ध्वस्तिकरण कि कार्यवाही पर क्षणिक रोक लगा दिया। जवाब ने जब कोर्ट को तहसील प्रशासन कि तरफ से बहस करने के लिए अपर महाधिवक्ता ने जवाब दिया कि जिस जमीन के बैनामे कि बात याची कर रहा है वह गाटा संख्या कहीं और है जिसकी वस्तुस्थित जीटीआर ब्रीज से भूपौली मार्ग पर है। जो पूरी तरह से खाली है। जिस अतिक्रमण पर कार्यवाही हो रही वह 1356 फसली से जीटी रोड के नाम से दर्ज है। जो डिवाइडर के उत्तरी व दक्षिणी दिशा में 110-110 फिट है। कोर्ट ने यह सुनते ही याचिकर्ता को जमकर लताड लगाया। इसपर सफाई देते फिर याचि ने नोटिस न देने का आरोप लगाया। जिसके जवाब में भी सबूत पेश किया गया। इसके बाद कोर्ट ने याचिका ख़ारिज करते हुए जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि पुनः एक बार एन लोंगो को नोटिस जारी कराया जाय। पीडब्लू डी कि जितनी जमीन है जिला प्रशासन चाहे टो खाली करा सकता है।