- सरकारी जमीनो पर धुँआधार करा रहे निर्माण
Chandauli news : जिले का एक ऐसा तहसील जहाँ हकीम पैसा लेकर सरकारी जमीन पर कब्जा कराते है। यह काला कारनामा तहसील बनने से पूर्व व नया तहसील बनने के बाद अनादि काल से हो रहा है। जबकि सरकारी मुलाजिमों की संलिप्तता मिलने व इसका का भंडाफोड़ होने के बाद तत्कालीन अधिकारियों पर निलंबन तक की कार्यवाही हो चुकी है। लेकिन इस कार्यवाही से कब्जा कराने की प्रवित्ती बदली नही।
हाल फिलहाल में यहां करोडो रुपया लेकर सरकारी जमीन को राजस्व कानूनगो, लेखपाल व एसडीएम ने मिलकर एक राज परिवार के नाम फर्जी तरीके से नाम चढ़ा दिया। जिसके बाद करोड़ो रूपये में जमीन की खरीद बिक्री शुरू हो गयी। इसकी जानकारी होने के बाद राजस्व निरीक्षक के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत हुआ।

वहीं बेचूपुर में पोखरी की जमीन पर लगातार कब्जा कर निर्माण कराया जा रहा। जिसकी शिकायत जिलाधिकारी व एसडीएम से भी किया गया। अब यह अधिकारी अपने नीचे के अधीनस्थो को काम सौंप दिए। लेकिन कार्यवाही के नाम पर केवल कागज का घोड़ा एक दूसरे के दफ्तर व मोबाईल पर ही दौड़ता रह गया। स्थिति यह हो गयी की अतिक्रमण कारी घर की छत बनाना शुरू कर दिया।
शिकायत कर्ता का कहना है की आराजी नंबर 1/6 खाता संख्या 186 मौजा बेचूपुर सरकारी अभिलेख में तालाब के रूप में दर्ज है। जिसपर वर्तमान समय में एक जनप्रतिनिधि के प्रतिनिधि उसपर कब्जा कर रहे है। यहां कार्य नगर पालिका का कार्य देख रहे राजीव सक्सेना के एसडीएम बनने के दौर से शुरू हुआ। कारण की ईओ का कार्यकाल में उक्त अतिक्रमण कारी से काफ़ी मधुर संबंध हो गया। एसडीएम अनुपम मिश्रा के ट्रांसफर जाने के बाद तत्काल चार्ज राजीव सक्सेना को दिया गया था। उसके बाद से जमीन को अतिक्रमण कर कब्जा करने वालों का हौशला इसकदर बुलंद हुआ की यह सब पक्का निर्माण शुरू कर दिये। कई बार तहसील में शिकायत हुआ लेकिन जब साहब ही मेहरबान रहे तो फिर प्रार्थना पत्र को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अब जब जिनके कंधे पर सरकारी जमीन को कब्जा मुक्त कराने की जिम्मेदारी है वहीं इसमें संलिप्त हो गये फिर तो मामला भगवान भरोसे है।

हलांकि बेचूपुर मामला जब डीएम चंद्र मोहन गर्ग के समाने पहुंचा तो उन्होंने गंभीरता दिखाते हुए एसडीएम को कार्यवाही करने का निर्देश दिए। अब एसडीएम तहसीलदार को तहसीलदार लेखपाल को मार्क करते रहे। उधर लेखपाल अतिक्रमणकारी का स्वजातीय होने के कारण पीठ पर हाथ रख दिए। जब जब अधिकारी सक्रिय हुए कुछ देर के लिए काम रुका। जाकसे ही इन लोगों का ध्यान भटका कार्य शुरू। फिलहाल छत तक कार्य हो गया राजस्व के अधिकारी एक दूसरे से पूछताछ करते रहे।