- जाँच में दोषी होंगे तो जाएगी कुर्सी, फिलहाल जाँच अधिकारी के कलम पर टिकी कुर्सी
- प्रेमजाल के चर्चित एसओ गौ तस्करों पर भी नरम

Chandauli news : पुलिस अधीक्षक आकाश पटेल के कोपभाजन का दो थाना प्रभारी सहित पांच लोग शिकार हुए है। दो थाना प्रभारियों के कुर्सी पर खतरा फिलहाल मंडरा रहा है। जो जाँच कर्ता के कलम पर टिकी है।
पुलिस अधीक्षक गौ तस्करों शराब माफियाओं पर कठोर कार्यवाही के लिए दिशा निर्देश दिए है। लेकिन उनके आदेश को एक कान से सुनकर दुसरे कान से निकालने क प्रचलन यहां के थाना प्रभारियों में है। जिसके कारण दंडात्मक कार्यवाही नहीं हो पायी। ऐसे में 02 थाना प्रभारी, 03 विवेचक व 01 हे0मु0 के विरुद्ध
अपर पुलिस अधीक्षक (आ0), सीओ सदर व क्सीओ पीडीडीयू नगर की रिपोर्ट के आधार पर कार्यवाही प्रचलित है।
कार्यवाही की जद मे कंदवा एसएचओ राजीव मल्ल है। जो पिछले दिनों अपने बेवफाई के लिए चर्चा में रहे। उनकी तथाकथित प्रेमिका ने एसपी के यहां आकर शिकायत की थी। लेकिन इसके बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हो पायी थी। हलांकि एसएचओ के प्रेम कहानी के विवाद का निपटारा आपस में हो गया था। अब प्रेम जाल में उलझे थानाध्यक्ष अपराध पर कहा गंभीर होंगे। जिसके कारण गो-वध निवारण अधिनियम, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम एवं भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं में पंजीकृत मुकदमों के शातिर अभियुक्तों के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट के तहत प्रभावी निरोधात्मक कार्रवाई अपने उछाधिकारियो के निर्देश के बाद भी नहीं किये। लापरवाही सीओ के समीक्षा उजागर हुआ। जो मु0अ0सं0-12/2026, मु0अ0सं0-26/2026 एवं मु0अ0सं0-117/2025 जैसे गंभीर मामलों में गैंगस्टर एक्ट की कार्यवाही हेतु आवश्यक पत्रावली समय से तैयार एवं प्रेषित नहीं की गई। इसे पदीय दायित्वों के प्रति घोर लापरवाही एवं शिथिलता मानते हुए थानाध्यक्ष कन्दवा राजीव मल्ल एवं हे0मु0 मनोज सागर के विरुद्ध प्रारंभिक जांच आदेशित की गई है।
वहीं थाना चन्दौली पर तैनात विवेचक निरीक्षक रामजीत यादव जो पीड़ितों से अपनी काबिलियत का ढिढोरा तो पीटते है लेकिन अपने विवेचना में उस काबिलियत को दिखा नहीं पाते। जिसके कारण मु0अ0सं0-61/2025 (आर्म्स एक्ट) में अभियुक्त सुभाष सोनकर के विरुद्ध आरोप पत्र प्रेषित किए जाने के बावजूद उसके कब्जे से बरामद चोरी की मोटरसाइकिल के भिन्न-भिन्न इंजन एवं चेचिस नंबरों का भौतिक सत्यापन नहीं कराया गया। मु0अ0सं0-304/2025 (एनडीपीएस एक्ट) में पिछले लगभग छह माह से कोई प्रगति पर्चा दाखिल नहीं किया गया तथा वाहन स्वामी का पता लगाने का कोई प्रयास नहीं किया गया।
इसी प्रकार मु0अ0सं0-301/2025 के साइबर धोखाधड़ी प्रकरण में नामजद आरोपियों के बयान दर्ज नहीं किए गए, उनकी सीडीआर प्राप्त नहीं की गई तथा उपलब्ध बैंकिंग साक्ष्यों का भी सत्यापन नहीं कराया गया। मामले में अन्य संभावित आरोपियों के विरुद्ध आवश्यक विवेचनात्मक कार्यवाही न किया जाना अत्यंत गंभीर पाया गया। समीक्षा में विवेचक की कार्यशैली को घोर लापरवाही एवं शिथिलता का परिचायक मानते हुए उनके विरुद्ध प्रारंभिक जांच आदेशित की गई है।
अलीनगर थाना जहाँ चार चार इंस्पेक्टर तैनात है। उसमें से तीन ऐसे जो थाने का इंचार्ज रह चुके है। जबकि एक थाना प्रभारी बने हुए है। क्षेत्राधिकारी पीडीडीयू नगर द्वारा की गई समीक्षा में पाया गया कि प्रभारी निरीक्षक थाना अलीनगर घनश्याम शुक्ल विगत लगभग तीन माह से थाना अलीनगर पर तैनात हैं। इस अवधि के दौरान जनपद के अन्य थानों द्वारा गोवंश तस्करी के विरुद्ध लगातार अभियान चलाकर कई वाहनों को पकड़ते हुए विधिक कार्रवाई की गई, परिणामस्वरूप गोवंश तस्करी के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई का अभाव स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुआ। जो पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही, शिथिलता एवं निष्क्रियता को दर्शाता है। उक्त तथ्यों को गंभीरता से लेते हुए प्रभारी निरीक्षक थाना अलीनगर घनश्याम शुक्ल के विरुद्ध पदीय दायित्वों के प्रति लापरवाही तथा उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना के संबंध में प्रारंभिक व विभागीय जांच आदेशित की गई है। वहीं इंस्पेक्टर अपराध दयाराम गौतम 15.06.2026 को वादिनी से प्राप्त तहरीर पर अभियुक्तों के विरुद्ध मु0अ0सं0 169/2026 धारा 115(2), 123, 351(3), 352, 64 बीएनएस के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया था। वादिनी द्वारा लगाए गए आरोप अत्यंत संवेदनशील प्रकृति के होने के बावजूद मुकदमा पंजीकृत होने के लंबे समय बाद भी विवेचक द्वारा साक्ष्य संकलन एवं अन्य आवश्यक विधिक कार्यवाहियों में अपेक्षित प्रगति नहीं की गई। उक्त प्रकरण में विवेचक निरीक्षक दयाराम गौतम का उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए उनके विरुद्ध प्रारंभिक जांच आदेशित की गई हैं।
इसके साथ है थाना शाहबगंज पर आईटीएसएसओ पोर्टल पर दो माह से अधिक समय से लंबित मामलों की समीक्षा के दौरान थाना शहाबगंज पर दर्ज मु0अ0सं0-25/2026 धारा 137(2) बीएनएस की विवेचना में गंभीर शिथिलता पाई गई। उक्त मुकदमा वादी की तहरीर पर उनकी 17 वर्षीय नाबालिग पुत्री को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने के संबंध में पंजीकृत किया गया था, जिसकी विवेचना दरोगा प्रेमचन्द्र सिंह द्वारा की जा रही थी। इनके विषय में यह चर्चा है की सूर्योदय के साथ सूर्यास्त तक कई डिग्री वाले बोलटेज मे मस्त रहते है। जिसके कारण समीक्षा में पाया गया कि मुकदमा दर्ज हुए दो माह से अधिक समय व्यतीत होने के बावजूद विवेचना का अंतिम निस्तारण नहीं किया गया तथा विवेचना में अपेक्षित प्रगति नहीं पाई गई।