- मिड डे मिल से लेकर सेवा प्रदाता तक से साहब का कमीशन फिक्स
- बिना मान्यता के विद्यालयों का संचालन कराने के लिये बीएसए लेते है मोटी रकम
- कार्यवाही के नाम पर नोटिस का झुनझुना
- डीएम ने खुद सौपी थी 14 विद्यालयों की सूची, जांच में बिना मान्यता के मिले विद्यालय फिर भी पठन पाठन जारी
- Chandauli news : शिक्षा विभाग में बेसिक शिक्षा के भ्रस्टाचार की अलग कहानी है। पहले यहां ट्रांसफर पोस्टिंग के नाम पर बीएसए करोड़ो करोड़ कमाते थे। लेकिन शासन ने ओस खेल को रोकने के लिये ऑनलाइन ट्रांसफर पोस्टिंग की व्यवस्था कर दिया। जिसस बीएसए की कमाई कम तो हुयी लेकिन इसके साथ एक दर्जन स अधिक मद दे दिया गया। जिसका पैसा खाकर बच्चों के भविष्य का नीव निर्माता अपने चेहरे को चुकंदर की तरह लाल कर रहे है। जिनके भविष्य की जिम्मेदारी दी गयी है वह उसी तरह फटेहाल घूम रहे है।
- कुछ ऐसी स्थिति इस समय वर्तमान बेसिक शिक्षा अधिकारी की है. सूत्रों की माने तो इन्हे विभाग का हर फाइल नोटों की गड्डी से भरी चाहिए। इसके बाद यह शासनादेश को भी तैलिया के नीचे दबाने से गुरेज नहीं करते। कमीशन खोरी के लम्बी रेस के कारण पिछले दिनों ई एजुकेटर चयन में पैसे के डिमांड का ऑडियो वायरल हुआ था। लेकिन फिर भी उसी एजेंसी से काम कराया जा रहा है। इसके साथ ही गाजियाबाद की एनजीओ जिले के 13 विद्यालय पर मध्याह्न भोजन खिलाने का टेंडर ली है। जिसके लिये लाखों रुपया ले जाती है। लेकिन बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण भोजन मयस्सर नहीं हो रहा। जिन जिम्मेदारों को इसके गुणवत्ता के लिये रखा गया है वह लाखों रुपया महीना के कंवर्जन कास्ट में ही अपना कमीशन सेट कर लोए है। जिसके कारण यह एनजीओ जैसा मन कर रहा वही परोस दे रही है। गुरुवार को डीडीयू नगर के एक विद्यालय पर मध्याह्न भोजन में कीड़ा मिला। अब बीएसए रिपोर्ट मंगाकर कार्यवाही करने का कोरा आश्वासन दे रहे है। जबकि इसके पहले भी जिलाधिकारी द्वारा बिना मान्यता के सौपी गयी 13 निजी विद्यालयों की सूची में तगड़ा लेन देन कर सभी को। नोटिस भर का आदेश दिया गया है। जबकि इन विद्यालयों में बिना मान्यता के ही कक्षाएं संचालित है।