- सपा के विधायक देर रात्रि तक बैठे रहे पीड़ित परिवार के साथ
Chandauli news : भोजापुर स्थित निर्माणाधीन पुलिस लाईन में पिछले दिनों उसी गांव के एक मजदूर अशोक राजभर की सातवें मंजिल से गिरकर मौत हो गयी। जिसकी जानकारी के बाद परिजन सहित ग्रामीण मृतक अशोक के परिजन को मुआवजा देने की मांग को लेकर शव को मुख्य गेट पर रखकर धरना देना शुरू कर दिए। जिसकी जानकारी होने के बाद पीड़ित परिवार के पक्ष में समाजवादी पार्टी से सकलडीहा विधायक प्रभानारायण यादव ने घटना स्थल पर पहुंचकर देर रात्रि तक मुआवजे की मांग को लेकर धरनारत हो गए। लेकिन राजभर समाज को एकजुट करने की जिम्मेदारी के लिए पार्टी में कैबिनेट मंत्री का दर्जा पाए अनिल राजभर घटना स्थल से चंद कदम की दूरी पर स्थित अपने आवास पर बैठे रहे लेकिन पीड़ित परिवार से मिलने नहीं आये।

हलांकि मामले की किरकिरी शुरू हुई तो कुछ मिडिया संस्थान में अपने लोंगो से यह संदेश भेजवा दिए की घटना को लेकर काफ़ी दुःखित है मामले की उच्च स्तरीय जाँच कराने का भरोसा दे रहे है। यहीं नहीं सकलडीहा में होने के बाद भी पीड़ित परिवार ने मिलने पर जब किरकिरी शुरू हुई तो शाम के समय पीड़ित परिवार से मिलने का प्रोटोकाल भी बना गया। जिसके लिए पुलिस लाईन का निर्माण कर रही एजेंसी के लोंगो को भी मौके पर पहुंचने के लिए भेज दिया गया। जिससे परिवार के सामने उन सभी को कुछ खरी खोटी सुनाकर सहानुभूति बटोरी जा सके। तय कार्यक्रम के अनुसार निर्माण एजेंसी के लोग पीड़ित के घर पहुंच गया। यहां तक की मंत्री ज़ी के काफिला में आगे आगे उन्हें रास्ता दिखाने के लिए चलने वाला स्कॉट भी गांव तक पहुंच गया। लेकिन अचानक से स्कॉट को वापस बुला लिया गया। जो चर्चा का विषय बना हुआ है।
निर्माण एजेंसी ने लोकल मजदूरों को किया बाहर : पुलिस लाईन निर्माण में कार्यरत नजदीक के मजदूरों अब निर्माण एजेंसी घटना के बाद से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। सूत्रों की मानें तो अब तक यहां सात मजदूरों की मृत्यु हो चुकी है। जिसमें तीन महिला मजदूर शामिल है। हलांकि इन मृतक मजदूरों में सभी झारखण्ड के रहे है। जिसके कारण निर्माण एजेंसी को बहुत मुसीबत का सामना नहीं करना पड़ा। एजेंसी के लोंगो ने ही घटना के दिन मुआवजे के लिए बैठे लोंगो के बीच यह स्वीकार किया कि इसके पूर्व कि घटना में मुआवजे कि राशि वह लोग 2 लाख तक दिए है जो अशोक के परिजन को दिया जायेगा। जिसके बाद ग्रामीण आक्रोशित हो उठे। जिसका परिणाम हुआ कि मुआवजे कि राशि 21लाख के आस पास पहुंच गयी। मुआवजे को लेकर लगभग चार घंटे तक चली कसमकस के बाद कंपनी ने स्वीकार करते हुए धन कि व्यवस्था में तो लग गए। लेकिन इसके साथ ही आस पास के गांव के काम कर रहे लगभग 50 से अधिक श्रमिकों को बाहर कर दिया गया।