- अवैध वसूली के खेल में मोहरा बना बलि का बकरा
- भ्रष्ट एआरटीओ सफेदपोशो के सामने शरणागत

Chandauli news :भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबे परिवहन अधिकारी सर्वेश गौतम के चेहरे से ईमानदारी का सफ़ेद चादर हर गया है। जिसके बाद चेहरा पूरी तरह से दिख रहा है। फिर भी अभी जांच के नाम पर बचाने कि पुरजोर कोशिश चल रही है। जबकि दिन प्रतिदिन एक से बढ़कर एक सबूत उजागर हो रहे है। कारखास के गिरफ्तार होने के बाद कार्यालय छोड़कर भागने वाले एआरटीओ ने जिले से दूर बैठे अपनी विभागीय आईडी लागिग कराया। जिसके डिजिटल हस्ताक्षर से शनिवार के दिन लाइसेंस व टैक्स का काम भी हुआ। उधर जांचा कर्ता अधिकारी एसआई भर्ती परीक्षा में व्यस्त होने कि बात कर रहे।

गाजीपुर के ट्रांसपोर्टर सुनील यादव ने आरोप लगाया है कि ट्रकों को बीच रास्ते में रोककर ट्रक कि इंट्री फीस देने कि बात कहते हुए महीना वसूला जाता है। इसके लिए ₹5000 महीने की ‘इंट्री फीस’ के नाम पर ली जाती है।
उसने बताया कि उसके पास 20 ट्रकें है। हर महीने सुविधा शुल्क के नाम पर पैसा ओं लाईन दिया जाता है। एक महीने में किसी कान वश पैसा नहीं दे पाने पर गाड़ी रामनगर में खड़ा करा दिया। जबकि इससे पहले भी करीब ₹90 हजार रुपये ‘इंट्री फीस’ के नाम पर ऑनलाइन वसूले जा चुके हैं। साथ ही करीब 06 लाख नगदी भी दिए जा चुके हैं।

एआरटीओ के लगातार वसूली कि राशि बढ़ा दी जा रही है। उन्होंने बताया कि एआरटीओ मौके पर आये या ना आये उनका कमीशन हर हाल में भेजना पड़ता है। चाहे वह उनके कारखास का खाता हो या फिर उनके इस खेल में सहयोगी अमित पेट्रोल पम्प मालिक। इन दोनों के खाते में पैसा भेजनें के बाद ही इंट्री संभव है।