सैदराजा में एफआईआर होने के बाद भी नहीं हो पायी थी गिरफ्तारी
हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे, फिर निलंबन के खिलाफ आदेश लेकर आया गौ तश्कर सिपाही

Chandauli news: भ्रस्टाचार पर जीरो टारलेंस की नीति की कार्यवाही में भेदभाव सामने आया है। भ्रस्टाचार के आकांठ में डूबे दो पुलिस वालों पर पर्याप्त सबूत होने के बाद भी जेल भेजने में पुलिस सरलता दिखायी। यहां तक की छूट ही नहीं बल्कि उसे न्यायालय से स्टे ऑर्डर ले आने का भी सलाह दिया गया। वरिष्ठों की सलाह भी काम आयी और आरोपी को न्यायालय से राहत भी मिल गया। अब उसे फिर से पोस्टिंग दी गयी है।

सैयदराजा में पीकेट बंद होने के बाद भी गौ तश्करी की शिकायत लागतार मिल रही है। इसमें पीकेट के पैसे की सीधे वसूली होने की बात सामने आयी। जिसके बाद पुलिस अधीक्षक ने अपनी एक टीम लगाया था । जांच में इस कार्य में दो सिपाहियों के माध्यम से वसूली होने का मामला प्रकाश में आया। एसपी ने अपर पुलिस अधीक्षक अनंत चंद्रशेखर को जांच के लिए लगाया था। इसमें डायल 112 के आरक्षी सतेन्द्र यादव व आरक्षी अजय पटेल ने गौ तश्करी की कमान संभाले मिले थे।

सूत्रों की माने तो सत्येन्द्र यादव थाने के 4500 रूपये को बढ़ाकर 9000₹ कर दिया था। यहां तक की सत्येन्द्र व अजय पटेल के के खाते में कई चक्र में पैसा आया। जो करोंडो रुपया के आस पास है। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक दोनों सिपाहियों को निलम्बित करते हुए इनके विरुद्ध दिनांक 29.05.2025 को थाना सैयदराजा पर मु.अ.सं. 131/2025 धारा 7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 पंजीकृत कर विभागीय जांच शुरू करा दिये थे। लेकिन भ्रस्टाचार में लिप्त इन सभी को गिरफ्तार नहीं किया गया था। जिसके बाद भ्रस्टाचारी गौ तश्कर सिपाही न्यायालय का शरण ले लिए। जहाँ से उनके गिरफ्तारी पर कोर्ट ने रोक लगा दिया।

गिरफ्तारी पर रोक के बाद हौशले से भरपूर इन सभी ने निलंबन वापस लेने के पुलिस कप्तान के यहां पहुंच गये। अपने ही आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट से स्टे की जानकारी के बाद पुलिस अधीक्षक ने निलंबन वापस नहीं किये। अब कोर्ट में भ्रस्टाचारियों को शरण मिलने के बाद इन सभी ने एक बार पुलिस अधीक्षक के निलंबन को कोर्ट में चैलेन्ज किये। यहां एक बार फिर से यह सफल हुए कोर्ट ने बकायदे निलंबन वापस का आदेश दे दिया। कोर्ट का आदेश मिलते ही उसपर आपत्ति कराने की बजाय भ्रस्टाचार में लिप्त सिपाही सत्येन्द्र यादव को चकरघट्टा पोस्ट कर दिए।
पहले भी भ्रस्टाचार में लिप्त पुलिस को कोर्ट से मिल चुका है राहत :
भ्रस्टाचार में लिप्त सत्येन्द्र यादव एक मात्र ऐसा आरोपी नहीं है जिसे न्यायालय से राहत मिला है। इसके पूर्व भी तत्कालीन पुलिस अधीक्षक रहे अमित कुमार ने गौ तश्करी में लिप्त दीवान अनिल कुमार के खिलाफ पर्याप्त सबूत व साक्ष्य मिलने बाद उसे एसओजी से पकड़वाकर जेल भेजे थे। इसके बाद विभाग से वर्खास्तगी की कार्यवाही भी हो गयी थी। लेकिन करोड़ो का जायदाद इस कार्य से बनाने वाले दिवान ने तत्कालीन एसपी व एसओजी के टीम सहित 21 लोंगो को पार्टी बनाया। यहीं नही अपने बर्खास्तगी को भी न्यायालय में चुनौती दिया जहाँ से उसे राहत मिल गयी। अंततः पुनः चंदौली में पोस्टिंग दी गयी। सत्येन्द्र के खिलाफ भी भ्रस्टाचार का मुकदमा दर्ज किये हुए लगभग पांच माह से अधिक का समय ब्यतीत हो गया है।
क्या कहते है अधिकारी : पुलिस अधीक्षक आदित्य लांग्हे का कहना है की जांच प्रचलित है। न्यायालय के आदेश पर निलंबन वापस लिया गया है।