- बलुआ मुगलसराय, सैदराजा व बबुरी के कारखास एसपी के ट्रांसफर सूची से बाहर
Chandauli news : जिले में ट्रांसफर पोस्टिंग के लिए कोई मानक निर्धारित नहीं है। यह पुलिस अधीक्षक का विशेषाधिकार है कि कैसे कब और कहा रखना है किसको हटा देना है। लेकिन सूत्रों कि मानें तो इसके साथ ही एक गोपनीय रिपोर्ट भी एलआईयू से मांगते है। उसमें थाना प्रभारियों के आलावा थानों पर कौन कारखास है। किस थाना क्षेत्र में कितनी गांजा कि दुकान है। कितने जगह पर अवैध काम हो रहे इसकि सूची एलआईयू देती है।
सोमवार को पुलिस अधीक्षक ने दो दर्जन से अधिक आरक्षी मुख्य आरक्षी का ट्रांसफर किये। जिसमें से विभिन्न थानों पर तैनात एक दर्जन कारखास ट्रांसफर सूची में शामिल है। सूत्रों कि मानें तो वह यही कारखास है जो एलाआईयू को मैनेज नहीं कर पाए। यहां तक कि कुछ जगह से तो नाम भेजना जरूरी था तो उन थानों से ऐसे नाम भेजे गए जिनको कारखास का काम क्या यह जानते भी नहीं। जबकि मैंनेजमेंट के खास जानकार अपनी रिपोर्ट एलआईयू सूची से हटवा लिए। ऐसे मैंनेजमेन्ट में महारथ हासिल करने वाले बलुआ के चर्चित कारखास जलभरथ यादव है। जिनकी पोस्टिंग तत्कालीन थाना प्रभारी अतुल प्रजापति ने एसपी आदित्य लांग्हे से कराये थे। अतुल के चकिया पोस्टिंग के दौरान यह वहां पर उनका काम देख रहे थे। बलुआ ट्रांसफर के बाद विशेष रूप से जलभरथ यादव व दीपचंद गिरी कि पोस्टिंग कराये थे। यह दोनों पुलिस कर्मी कभी वर्दी पहने नहीं बल्कि इनके कार्य का तरीका सीधे एसओ के कमाई का जरिया था। यह लोग क्षेत्र के 10-12 युवकों को थाने ले आते थे उन सभी को शाम तक बैठाकर मैंनेजमेंट करते हुए 09 को छोड़ना और एक को फर्जी कट्टा के साथ चालान करना इनका काम बन गया था। सुट्रोन कि मानें तो कट्टा बनाने का काम क्षेत्र का ही एक लोहार करता था जो 2000₹ में देता था। एक बार एक साथ चार कट्टा बनाने से मना करने पर उसे ही फैक्ट्री का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस जेल भेज दी। इसके साथ ही ट्रैक्टर चालकों से पैसा लेने का ऑडियो वायरल होने पर दीपचंद गिरी को लाईन हाजिर किया गया था। लेकिन इन लोंगो की रिपोर्ट एलआईयू कभी नहीं दी। फिलहाल जो सूची जारी हुई है उसमें भी एलआईयू ने बलुआ के जलभरथ यादव, इलिया के मनीष सिंह, सैदराजा के बृजेश यादव, मुगलसराय से सनोज सिंह, राकेश सिंह व बबुरी के बलराम सिंह पर अपनी छत्रछाया बनाये हुए है।