- वाहन चेकिंग अभियान कि घंटे भर पहले लोकेटर को मिल जाती है सूचना
- आरोप पर गोल गोल घुमा थे मुगलसराय एसएचओ डीआईजी ने लिया संज्ञान, दर्ज करनी पड़ी मुकदमा

Chandauli news : मुगलसराय व वाराणसी की पुलिस व यातायात के लिए काम करने वाले मनीष के खिलाफ आखिरकार डीआईजी वैभव कृष्णा के सख्त होने पर मुगलसराय पुलिस को मुकदमा दर्ज करना पड़ गया। पहले मामले को मुगलसराय एसएचओ व यातायात प्रभारी आरोप को सिरे से ख़ारिज कर दिए थे। लेकिन जब डीआईजी की गोपनीय टीम ने जाँच किया तब मामला सही पाया। इसके बाद चौकी इंचार्ज के तहरीर पर मुकदमा दर्ज हुआ।

मुगलसराय पुलिस यातायात के रहमोकरम व उनके राजस्व का सहयोगी बनने के लिए एक ऑटो गैंग काम कर रहा था। यह गैंग मनीष नमक युवक ने बनायी है। जिसमें इलेक्ट्रीक ऑटो व सीएनजी ऑटो का अलग अलग ग्रुप है। वाहन जाँच अभियान में वाहन न पकड़े जाय। इसके लिए नाम पर अलग नेक्शस है। जो पुलिस के आगामी अभियान कि जानकारी होते ही अलर्ट कर देता है। यही नहीं किस रास्ते से मुगलसराय कि सकरी गलियां पार कर स्टैंड तक पहुंचेंगे।

पुलिस व इस नेक्सेस ग्रुप का 24newstime.com ने खुलासा किया था। बिना परमिट वाले आटो को चेकिंग के लोकेशन देकर सचेत किया जा रहा है। इसके लिए दो हजार रुपया प्रतिमाह प्रति वाहन निर्धारित है। मुगलसराय से वाराणसी जाने वाले 250 से अधिक ऑटो है। पुलिस के कारनामें का उजागर होने पर मुगलसराय एसओ ने इसे झूठा बता दिया था। मिलीभगत के कारण निष्क्रियता का आलम यह है कि एक सप्ताह से कतिपय मनीष का व्हाट्सएप ग्रुप वायरल होने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हुयी। जिसके बाद डीआईजी वैभव कृष्णा ने मामले को संज्ञान लिया। गोपनीय जाँच में एस ग्रुप की सच्चाई सामने आयी। जिसके बाद मुगलसराय के चौकी प्रभारी ने मनीष के उपर मुकदमा दर्ज कराया।