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कंदवा व इलिया के रास्ते जमकर हो रही गौ तस्करी बॉर्डर के कैमरे बंद

  • 20-25 हजार रुपया पर बनी बात-चीत, नहीं बोलेगी पुलिस
  • बॉर्डर के थानों पर लगा कैमरा पीछे कई माह से बंद




Chandauli news : धान के कटोरा नाम से पहचान बनाये जिले कि पहचान अब बदल गयी है। राजधानी से लेकर जोन स्तर पर अब यह जिला तस्करी के नाम से पहचान बना लिया है। तेल तस्करी से लेकर गौ तस्करी, शराब तस्करी जैसे संगठित अपराध यहां पाँव जमा लिए है। संगठित अपराध को रोकने के लिए सरकार भले ही बहुत संवेदनशील है। लेकिन जिनके कंधे पर यह जिम्मेदारी दी गयी है वह इस अपराध को रोकने में शायद पस्त हो गए है। जिसका असर है कि इस समय बॉर्डर के थानों पर गौ तस्करों कि गाड़ी बिना किसी रोक टोक के पार हो रही है।

गौ तस्करी जैसे अपराध के अलावा जमा आदि कि समस्या को मुख्यालय से बैठे बैठे देखने के लिए लाखों रुपया खर्च कर यहां स्मार्ट कंट्रोल रूम बनाया गया। जहाँ 5-5लाख के लागत कि दो व लगभग 3-3लाख के लागत कि स्मार्ट टीवी लगाए गए। इसके साथ ही आरामदायक आधा दर्जन कुर्सी टेबल के अलवा वातानुकूलित कक्ष बनाये गए। जिसका शुभारम्भ चार चार आईपीएस अधिकारियों इसमें एड़ीजी पीयूष मोर्डिया, डीआईजी वैभव कृष्णा, पुलिस अधीक्षक आदित्य लांग्हे व अपर पुलिस अधीक्षक आईपीएस अधिकारी अनंत चंद्रशेखर ने किया। स्मार्ट कंट्रोल रूम का उद्धघाटन करते हुए एडीजी ने प्लान के बाबत जानकारी लेने के बाद इसे पूरे जोन में लागू कराने के लिए कहा।


लेकिन महीना दो महीना के बाद ही जिस उद्देश्य से स्मार्ट कंट्रोल रूम का स्थापना किया गया था वह केवल शो पीस बनकर रहा गया। कारण कि कई एजेंसियों ने मिलकर 48 कैमरे दिए थे। उसके बाद विभाग आगे एक भी कैमरा लगवा नहीं पाया। यही नहीं इलिया कंदवा, नौबतपुर बॉर्डर पर लगे कैमरे स्मार्ट कंट्रोल से अब तक जुड़ नहीं पाए है। इन क्षेत्रों मे कैमरे लगे ही नहीं है। जो लगे है वह भी बदहाली कि स्थिति में बंद पड़े है। पुलिस कि तीसरी आँख ख़राब है इसकी जानकारी पशु तस्करों को भी है। जिसके कारण गौ तस्करी जोरों पर चल रही है। इलिया के मालदह पुलिया से या फिर कंदवा के ककरैत घाट, रामपुर चौकी होते हुए कम्हरिया के रास्ते गाड़ियां धड़ल्ले से निकल रही है।
सूत्रों कि माने तो कंदवा में तो रात्रि 09 बजे से गाड़ियां पास हो रही रही। इसके लिए बकायदे प्रभारी, एक तथाकथित जनप्रतिनिधि के बीच डील हुआ है। इसमें प्रतिदिन का 20 हजार रुपया तीन पीकप हाफ डाला का तय हुआ है। जो सप्ताह में दो से तीन दिन निर्धारित रास्ता से बिना तिरपाल बांधे सात आता कि संख्या में गौ वंश लेकर पार हो रहे है।

मृत्युंजय सिंह

मैं मृत्युंजय सिंह पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र में विभिन्न राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त न्यूज़ सम्प्रेषण के डिजिटल माध्यम से जुडा हूँ.मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की ख़बरों को प्रमुखता से उठाना एवं न्याय दिलाना है.जिसमे आप सभी का सहयोग प्रार्थनीय है.

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