दम्पत्तियों कि आपसी रजामंदी बने या न बने रजिस्टर पर जबदस्ती बनाना पड़ता है सहमति

Chandauli news : महिला अपराध, पति पत्नि के बीच चल रहे मनमुटाव को मिडिएशन के माध्यम से एक दूसरे के रिश्ते को पुनः ठीक करने के लिए महिला थाना बनाया गया है। जहाँ महिला एसओ को प्रभारी बनाया गया है। लेकिन स्थिति यह कि यहां एसओ बैठना उचित नही समझती। थाने पर मिडिएशन का कार्य यहां पर चार से पांच वर्षो से तैनात महिला दिवान करती है। थाना प्रभारी के न बैठने से इन महिला दिवान का ही साम्राज्य होता है। जो यहां आने वाले फरियादियों से बदसलुकी करती है। यहीं नही अति पत्नि के बीच मनमुटाव दूर करने कि बजाय इन महिला दीवान के बर्ताव से रिश्ते जुड़ने कि बजाय और तनाव पूर्ण हो जा रहे है।

पारिवारिक विवाद या तालमेल कि कमी के कारण पति पत्नि एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाते हुए एक दूसरे के अलग रहने का मन बना लेते है। सात जन्म तक विवाह के बंधन में बंधकर कसम खाने वाले आक्रोश में घर का चौखट लाँघने से गुरेज किये बिना न्यायालय शरण तक पहुंच जा रही। जिसकी शुरुआत थाने से होती है। हलांकि शासन ऐसे मामले में मिडिएशन के माध्यम से इन रिश्तो को टूटने से बचाने का पहल कि है। जिसके लोए महिला थाना बनाया गया है। लेकिन यहां महिला थाने कि स्थिति यह है कि यहां पर तैनात थाना प्रभारी कब मिलेंगी इसका कोई निश्चित समय ही नही है।
उस स्थिति में यहां पर तैनात महिला दिवान ही कमान संभालती है। प्रभारी के उपलब्ध न होने के कारण इन्ही लोंगो का साम्राज्य चलता है। कुछ पीड़ितों का कहना है कि घर का माहौल तनावपूर्ण होने के बाद मनःस्थिति ऐसे ही ख़राब रखती है जो यहां पहुंचने के बाद और बढ़ जाती है। यहां पर तैनात दिवान बदसलुकी से पेश आती है। यहीं नही बिना हर मिडिएशन तिथि पर बकायदे न्यायालय कि तारीख पर जैसे फिस देनी पड़ती है वैसे यहां भी देना पड़ता है। यहीं नही बात बने या न बने जबरदस्ती सहमति रजिस्टर पर भी हस्ताक्षर कराया जाता है।