- निजी दुकानादारों से अच्छी आमदनी करते है जिलाकृषि अधिकारी
- लखनऊ कि आयी टीम तो बंद मिली निजी दुकान

Chandauli news : खरीफ सीजन कि शुरुआत हो गयी। किसान पानी व खाद के लिए शोरगुल शुरू कर दिए है। कुछ दिनों में खाद कि किल्लत न होने पाए इसके लिए कृषि विभाग के साथ साथ सहकारिता कि नकेल भले कस रहे हों लेकिन कृषि विभाग में सुधार होने वाला नहीं है। यहां काला बाजारी व ऊँचे क़ीमत पर आज भी किसानों को खाद ख़रीदना पड़ रहा है। जबकि मंगलवार को खुद जिलाधिकारी बी पैक्स के सहकारी समिति पर पहुंचकर स्टॉक व रेट आदि का जायजा लिए। उन्होंने खाद कि कालाबाजारी व ऊँचे क़ीमत पर किसी भी स्थिति में न होने का निर्देश भले ही दिए लेकिन असल कालाबाजारी जहाँ हो रही वहां पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाए।
सूत्रों कि मानें तो दुकानदार इस मुनाफाखोरी के लिए बकायदे विभाग को सीजन के हिसाब से सुविधा शुल्क देते है। इसमें खाद, बीज व दवा के दुकानदारों का अलग अलग रेट निर्धारित है। यही नहीं बकायदे विभाग भी इस सुविधा शुल्क लेने के बाद दुकानदारों का बाहरी टीम से हिफाजत भी करता है।
जिलाधिकारी को श्रोत से मुनाफाखोरी कि जानकारी होने के बाद एसडीएम या भी किसी दूसरे विभाग से छापेमारी करा दें। अनियमितता पकड़ भी जाये तो कार्यवाही का अधिकार जिलाक़ृषि के पास है। जहाँ से सब मैनेज होना संभव है। यही नहीं पिछले दिनों लखनऊ कि टीम जिले में छापेमारी करने आयी थी। जो सकलडीहा व सदर विकास खंड क्षेत्र में भ्रमण कि लेकिन विभागीय तलामेल ठीक ठाक होने के कारण सभी निजी दुकानारों को इसकी जानकारी हो गयी। एक भी दुकान उस दिन खुले नहीं मिले। जिसकी वजह से बिना सैम्पलिंग किये ही टीम वैरंग वापस हो ली। सहकारी समिति पर डीएपी ₹1350 के स्थान पर ₹1360 में बिक रही है। जबकि वहीं डीएपी निजी दुकानदार ₹1500 में बेच रहे। यूरिया ₹266 कि जगह सरकारी पर ₹276में जबकि प्राइवेट दुकानदार ₹330 में बेच रहे है।