- पूर्व के बैठक में कमीशनखोरी को लेकर हो चुका है तू तू मैं मैं

Chandauli news : केंद्र व राज्य सरकार से विकसित के नाम करोड़ो करोड़ रुपया स्वीकृत होने के बाद उस बजट का आधा से ज्यादा हिस्सा जनप्रतिनिधियों के कमीशनखोरी में खर्च हो जाता है। बचे बजट में ठेकेदार को अपना भी बजत करना होता है। फिर दोयम दर्जे के काम को पास कराने के लिए अधिकारियों को भी देना पड़ता है। ऐसे में करोड़ो कि लागत से बनने वाली सडके चंद दिनों मे खराब हो जाती है। बिजली के तार बदलने के लिए कई बार बजट आया लेकिन आज भी तार बदले नहीं गए। अब यह सब मुद्दा जिला के निगारानी समिति कि बैठक (दिशा ) में उजागर होगा। इसके बाद इसमें किसी न किसी जनप्रतिनिधि का ही हाथ सामने आएगा। फिर बात सार्वजनिक होंगी। इस मुद्दे पर पक्ष विपक्ष के साथ कमीशन के हिस्सेदार अधिकारियों कि जुगल बंदी उस समय दिखी जब दिशा कि बैठक होने वाली थी। जिसमें मिडिया को बाहर रखने का निर्णय लिया गया। कारण कि इसके पूर्व इन जनप्रतिनिधियों ने कलेक्ट्रेट सभागार में जमकर लड़े थे। विकास के मुद्दे कि बात होने के बजाय गाली गलौज कि बात सार्वजनिक हो गयी थी। जिसकी जमकर किरकिरी हुयी थी। फिर से इस तरह कि स्थिति न आने पाए इसके लिए कलेक्ट्रेट पर बकायदे पुलिस का पहरा लगा गया था।
इसके लिए चार थाने के फ़ोर्स कि लिखापढ़ी में हेलमेट, डंडा बाड़ी प्रोटेक्टर के साथ ड्यूटी लगायी गयी थी। सूत्रों कि माने तो दिशा बैठक कि अध्यक्षता कर रहे सपा सांसद ने चंदौली सैदपुर स्टेट हाइवे के निर्माण में कमीशन खोरी का आरोप लगाते हुए कहा कि सड़क अभी बनी नहीं तब तक जहाँ बनकर तैयार है वह टूटने लगी। स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर उन्होंने नाराजगी जाहिर किया तब तक भाजपा के किसी जनप्रतिनिधि ने मंडलीय चिकित्सालय से प्राइवेट अस्पताल में मरीज रेफर करने के दबाव का मुद्दा उठा दिया। इतना सुनते ही सपा सांसद भड़क उठे। सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच तल्खी शुरू हो गया। वहीं बैठक में सैदपुर के पास पुलिस द्वारा लगाए गए बैरियर का सकलडीहा विधायक ने मुद्दा उठाया जिसपर अधिकारियों के जवाब देने कि बजाय पुनः पुलिस के उस कार्य का सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधि ने समर्थन करते हुए कहा कि ओवर लोडिंग पर प्रशासन काम कर रहा है तो परेशानी क्या हो रही है। इसपर भी कुछ समय के लिए मनमुटाव हो गया। दिशा कि बैठक में जनता के जगह ब्यक्तिगत लाभ कि बातें मिडियाकर्मियों के रहने से सार्वजनिक हो जाती ऐसे में सबको बाहर ही रखना दोनों पक्ष ने मुनासिब समझा। बैठक के दौरान जब सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों से मिडियाकर्मियों ने सम्पर्क किया तो वह दिशा के बैठक का अध्यक्षता कर रहे सपा सांसद के पल्ले में गेंद डाल दिया। वहीं सपा सांसद जिला प्रशासन कि व्यवस्था बता कर अपना पल्ला खींच लिया। हलांकि पत्रकारों ने भी इसका बदला लिया जब बैठक से बाहर निकले सांसद के सामने दर्जनों पत्रकारों ने अपनी आईडी लगाकर फिर वापस कर लिया।