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खुशबू ने खरीद लिया था बलुआ पुलिस का कानून, ज़ब तक रहे “अतुल” नहीं दर्ज हुआ मुकदमा

  • जिस आरोप में खुशबू को भेजा गया जेल, चार माह लग गए दर्ज
  • करने में एफआईआभ्रस्टाचार का पराकाष्ठा पार, फिर भी साहब मेहरबान

Chandauli news :” तारीख दर तारीख देकर वह गरीबों को रुलाते है, पैसों कि ताकत पर वह मुजरिमों को रिहा करवाते है ” यह चंद लाईन बलुआ के तत्कालीन थाना प्रभारी अतुल प्रजापति पर सटीक बैठ रही है। उनके कार्यकाल में खुशबू किन्नर ने बलुआ थाने के कानून व्यवस्था को पैसों से खरीद लिया। जिसके आगे यह नतमस्तक रहे। कानून व्यवस्था कि धरातलीय समीक्षा के बजाय डिजिटल मॉनिटरिंग व आंकड़े बाजी के दौर में फर्जी प्रियेंटिव से उच्चाधिकारियों के आँखों पर पट्टी बांध कर कानून को कानून को बेचने में यह पूरी तरह सफल रहे।

अधिकारियों ने आँख बंद कर इस कदर विश्वास किया आज चंदौली पुलिस कि जमकर किरकिरी हो रही है। यह कोई आरोप नहीं बल्कि सोलह आने सत्य है।पिछले दिनों बलुआ पुलिस ने मोहरगंज निवासी खुशबू किन्नर को सड़क जाम करने, रंगदारी मांगने जैसे आधा दर्जन अपराध में जेल भेज दिया। खुशबू के खिलाफ 21 फ़रवरी को बलुआ थाने में मुकदमा दर्ज हुआ और 11 मार्च को कार्यवाही हुयी। जबकि घटना 24 दिसंबर 2025 कि है। ज़ब खुशबू के घर बम का विस्फोट हुआ था। इसमें खुशबू ने जिन लोंगो को आरोपी बनाया उनके उपर कार्यवाही करने का दबाव बनाने के लिए चहनिया चौराहे को 2 घंटे तक जाम कराया था।

इन सभी को समझाने के लिए सीओ सहित आधा दर्जन थाना प्रभारियों के पसीने छूट गए। सामान्य ब्यक्ति सड़क जाम कर दे तो पुलिस तत्काल कई संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर देती है। लेकिन यहां ऐसा नहीं हुआ। सूत्रों कि माने तो आरोपियों पर कार्यवाही के नाम पर लाखों कि डील के आगे किन्नरों का कानून तोडना सामान्य बात हो गयी। इन सभी के खिलाफ पड़े प्रार्थना पत्र को कूड़े में डाल दिया गया। यही नहीं थाना प्रभारी का समर्पण इस कदर हो गया कि वरिष्ठ अधिकारियों से बकायदे सुरक्षा दिए जाने कि सिफारिश भी कि गयी।

थाना प्रभारी के रिपोर्ट के बाद थाने से सुरक्षा में एक गनर भी उपलब्ध करा दिया गया। लेकिन परिस्थिति बदली मुख्यमंत्री ने मामले का संज्ञान लिया जिसपर तीन महीने बाद चहनिया चौराहे को जाम करने, रंगदारी मागने जैसे अपराध में मुकदमा दर्ज किया गया। वह भी तब दर्ज हुआ ज़ब थाना प्रभारी का स्थानांतरण पेशकार के रूप में हुआ। इसमें भी पुलिस कि शिकायत पर नहीं। बल्कि बबिता सिंह से प्रार्थना पत्र लेकर मुकदमा दर्ज कराया गया। जबकि किन्नरों ने ड्यूटी पर तैनात एसएसआई के साथ बदसलुकी किये थे। लेकिन तीन माह का समय ब्यतीत होने के बाद पुलिस धरना में शामिल लोंगो का पहचान नहीं कर पायी है।

इस संबंध में सीओ सकलडीहा का कहना है कि धरना के समय पुलिस वीडियो व फोटो ग्राफ़ी कराई है। 50 अज्ञात लोंगो के खिलाफ मामला दर्ज है। इन लोंगो कि पहचान कराकर कार्यवाही कि जाएगी।

मृत्युंजय सिंह

मैं मृत्युंजय सिंह पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र में विभिन्न राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त न्यूज़ सम्प्रेषण के डिजिटल माध्यम से जुडा हूँ.मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की ख़बरों को प्रमुखता से उठाना एवं न्याय दिलाना है.जिसमे आप सभी का सहयोग प्रार्थनीय है.

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