- आर एस यादव की तरह ही लुटेरा एआरटीओ सर्वेश गौतम
- आरएसयादव का ड्राइवर करता था अवैध वसूली, गौतम का सिपाही
- ट्रकों से पांच हजार रुपया महीना एंट्री फीस मांगने का आरोप
आरोपी सिपाही गिरफ्तार एआरटीओ पर कार्यवाही नहीं
Chandauli news : अवैध वसूली व भ्रष्टचार के पीलर पर खड़ा एआरटीओ विभाग एक बार फिर से चर्चा में है। कारण की यहां पर तैनात भ्रष्ट एआरटीओ सर्वेश गौतम की कारस्तानी उजागर हुयी है। लेकिन कार्यवाही के नाम पर अधिकारियों की कमजोर इच्छाशक्ति उजागर हो गयी। कार्यवाही के नाम पर केवल सिपाही को जेल भेज कोरमपूर्ति कर दिया गया। जांच के नाम पर सीओ सदर को लगा दिया गया है।

गाजीपुर के ट्रांसपोर्टर सुनील यादव ने एडीजी से शिकायत किया की चंदौली एआरटीओ में तैनात सिपाही दुर्गा श्रीवास्तव सुनील कुमार यादव पुत्र भरत सिंह यादव ग्रा० नसीरपुर थाना नोनहरा जि० गाजीपुर का रहने वाला हू मेरा TSY नाम का एक ट्रांसपोर्ट रानीपुर नोनहरा गाजीपुर में हैं। जिसमें मेरी व परिवार की कुल 20 ट्रकें ट्रांसपोर्ट में चलती हैं। जो कि अलग अलग जनपदों से गिट्टी लाकर बेचते हैं। तथा उसी पैसों से अपना जीवन यापन करते हैं। कई बार जनपद चन्दौली के ARTO विभाग के सिपाही दुर्गा श्रीवास्तव ने मेरी ट्रकों को बेवजह रास्ते में रोककर गलत तरीके से पैसा वसुलने के लिए चालान कर चुके हैं। इसी क्रम में दिनांक 19/20-02-2026 की रात में ARTO विभाग चन्दौली के सिपाही दुर्गा श्रीवास्तव नें चन्दौली मिर्जापुर बार्डर बरईपुर के पास मेरी खडी गाडी

UP61AT9057 (ट्रक) को जबरदस्ती खीचकर चन्दौली जिले के अन्दर लाने लगे और जब मेरे द्वारा ड्राईवर से वार्ता के बाद सिपाही दुर्गा श्रीवास्तव से बात की गयी तो दुर्गा सिपाही द्वारा कहा गया कि हर महीने 5000 (हजार) रुपया की इण्ट्री प्रति ट्रक करवाओं नही तो तुम्हे हम बर्बाद कर देगें। जब मेरे द्वारा इण्ट्री का पैसा नही दिया गया तब कुछ देर बाद मेरी गाडी का चालान करके उसकों सीज कर औद्योगिक नगर पुलिस चौकी चन्दौली जनपद में खड़ी कर दिए। और फोन करके प्रति ट्रक 5000/- रुपया इण्ट्री फीस की डिमांड करने लगे इसके पहले मैने व मेरे रिश्तेदारो ने मिलकर कुल 90000/-(हजार) रुपया आनलाईन व कुछ हजार रुपया कैश इण्ट्री फीस के नाम पर दुर्गा श्रीवास्तव द्वारा भेजे गये (बार कोड) पर दे चुका हूँ, साहब दुर्गा श्रीवास्तव (PTO) सिपाही द्वारा मुझको लगातार पैसा वसूलने के लिए परेशान किया जा रहा है।
मामले को एडीजी ने संज्ञान में लेकर मामले की जांच कराने के लिए कहा। जिसके बाद इंस्पेक्टर सदर को जांच दी गयी। जांच में आरोप सही पाया गया। इसके बाद आरोपी सिपाही को गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन भ्रष्ट एआरटीओ पर कोई कार्यवाही नहीं हुयी। जबकि ठीक इस तरह का मामला वर्ष 2017 में घटित हुयी थी। उस समय तत्कालीन एआरटीओ आरएस यादव का चालक गाड़ी लगाकर बिछिया के पास ट्रक से वसूली कर रहा था। मुख्यालय से मुगलसराय जा रहे तत्कालीन सीओ त्रिपुरारी पाण्डेय ने ड्राइवर को पकड़ लिया। उन्होंने इसकी जानकारी पुलिस अधीक्षक रहे संतोष सिंह को दिया।जीटी रोड पर एआरटीओ के अवैध वसूली के जगजाहिर कारनामें पर पुलिस अधीक्षक संतोष सिंह ने गंभीरता दिखाया। इसके बाद देखते ही देखते चर्चित एआरटीओ आरएस यादव को गिरफ्तार कर लिया गया। एआरटीओ के गिरफ्तार होने के बाद पक्ष से लेकर विपक्ष तक के कई सफेदपोशों ने पुलिस अधीक्षक के यहां दबाव बनाना शुरू कर दिया। लेकिन दृढ इच्छाशक्ति के अधिकारी द्वय ने स्टैंड लिया। स्थिति यह हुयी की आरएस यादव लगभग दो वर्ष तक जेल रहे।
सरकार ने भी मामले में गंभीरता दिखाया इसके बाद आरएस यादव के कई करोड़ के बेनामी सम्पत्ति उजागर हुयी थी। लेकिन इस बार भी बिल्कुल उसी तरह का आरोप उजागर हुआ। लेकिन कार्यवाही के नाम पर केवल सिपाही को गिरफ्तार किया जो चर्चा विषय बना है।