शराब बरामदगी : पब्लिक को पता है कि शराब किस किस दुकान से लदी, लेकिन पुलिस व आबकारी चार दिन में नहीं लगा पायी पता
- आखिर शराब दुकानदार इसी सुविधा के लिए तो थाना, आबकारी व अन्य को देते है महीना
Chandauli news : एक कहावत है “पब्लिक सब जानती है “ यह इन समय स्वाट सर्विलांस के द्वारा पकड़ी गयी शराब के बाद की कार्यवाही पर सटीक बैठ रहा है। सोमवार के दिन स्वाट व सर्विलांस ने 1354 लीटर शराब से भरी ट्रक को पकड़कर कंदवा पुलिस के हवाले कर कंदवा के गुडवर्क का खाता तो खोलवा दिए। लेकिन शराब के साथ साथ कंदवा, आबकारी सहित अन्य एजेंसियों के लिए किरकिरी भी करवा गए। इन सभी एजेंसियों के काले कारनामें सामने आ गए है। तीन दिन बीत जाने के बाद भी जिस दुकान कि शराब है उनमें से किसी के नाम का खुलासा पुलिस कर नहीं पायी या करना नहीं चाहती। जबकि शराब जिले के ही दो दुकानों कि है इस बात को पब्लिक जान रही है। बावजूद पुलिस मौन साधे हुए यह चर्चा का विषय बना हुआ है।

सोमवार के दिन गाजीपुर जिले का ट्रक संख्या UP 60 BT9648 को जिले कि क्राइम ब्रांच टीम ने पकड़ लिया। यह कार्यवाही मुखबीर के सूचना पर हुई। गाजीपुर कि ट्रक में शराब होने के कारण अपराध पर काम करने में नाकाम कंदवा एसओ कि कुर्सी बचाने के लिए क्राइम ब्रांच मेहरबान हो गयी। उधर बिना मेहनत के ही पका पकाया ब्यंजन मिलने जैसी खुशी से प्रफुल्लित एसओ भी मय टीम फर्द में शामिल होने के लिए आ गये।
सूत्रों कि माने तो ट्रक से शराब उतरने से पूर्व तक किसी को भी यह भनक नहीं लगा कि शराब कहा कि है। तस्कर अपने जुगाड़ लगाते इसके पूर्व युद्ध स्तर पर खाली कराया जाने लगा। सरकारी मलखाने में पहुंचने से पूर्व निज़ी मलखानों में भी लगभग 50 पेटी पहुंचा दी गयी। इसके बाद 147 पेटी सरकारी मलखाने के लिए उतारा गया। जब पेटी खोलकर सैम्पलिंग के लिए निकाली गयी तो उत्तर प्रदेश मॉडल का शराब देख कौतुहल हुआ। तब तक जिसकि शराब पकड़ी गयी थी उसके कान तक कार्यवाही कि खबर लग गयी। अब यहां हर माह कंदवा थाने को 25 हजार, आबकारी को 10 हजार, के अलावा अन्य एजेंसियों को सुविधा शुल्क देने वाला दुकानदार पूरे आत्म विश्वास से लभरेज होकर एसओ, आबकारी व स्वाट तक फोन कर गया। लेकिन मामला उजागर होने के कारण अब इन एजेंसियों कि स्थिति सांप छूछून्दर वाली हो गयी। हलांकि धंधा करने वाला आने नफरत नुकसान को समझता है। अब पुलिस व आबकारी से आगे कि कार्यवाही न होने पाए इसपर बात डील शुरू हो गयी। ड्राइबर के पकड़े जाने के बाद भी अज्ञात अनुज्ञापी के खिलाफ मुकदमा लिखकर पुलिस पल्ला झाड ली। चार दिन में आबकारी और पुलिस यह नहीं पता लगा पायी कि किसके दुकान कि शराब है जबकि आम जनमानस को यह जानकारी है कि जो शराब पकड़ी गयी है वह चकिया और कंदवा के दुकान की है।