- प्रदेश में मेडिकल कालेज का भरमार, डॉग रेविज की नहीं व्यवस्था
- बीएचयू व कबीरचौरा के बीच फुटबाल बन कर रह गया बजीर
Chandauli news : वाराणसी को क्योटो सिटी बनाने का सपना दिखाने वाले प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में कुत्ता के काटने के संक्रमित मरीज के ईलाज की कोई ब्यवस्था नहीं है। जबकि प्रदेश के हर जिले में मेडिकल कालेज देने वाले प्रदेश सरकार के मेडिकल ऑफिसर तो इस तरह का केस आने पर अपना फोन ही स्वीच ऑफ़ करना इस समस्या का निदान समझते है। ख़राब चिकित्सा व्यवस्था के कारण शनिवार की रात्रि में शाहबगंज का बजीर काफ़ी जद्दोजहद के बीच जब अस्पताल में भर्ती हुआ उसके दस मिनट बाद ही ईलाज के आभाव में दम तोड़ दिया।

शाहबगंज के बजीर को 14 जुलाई के दिन कुत्ते ने काट लिया। जिसके बाद रेबीज के लिए वह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा। जहाँ रेबीज न होने के कारण टीटी का इंजेक्शन लगाकर चिकित्सकों ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल पर पहुंचने के बाद 04 दिन में पूरा कोर्स लगाया गया। लेकिन टीकाकरण के एक महीने बाद ही बजीर के संक्रमित होने का लक्षण दिखाई देने लगा। पानी को देखकर भागना, कुत्ते जैसी हरकत आदि देखकर परिजन जिला अस्पताल गए। जहाँ कोई व्यवस्था न होने पर इसे बीएचयू के लिए रेफर कर दिया गया। जहाँ एम्बुलेंस से पहुंचने के बाद स्थिति देख चिकित्सकों ने ईलाज करने की बजाय उसे कबीरचौरा भेज दिया। लेकिन यहां न तो डॉक्टर मिले और ना ही रेबीज। मोदी के संसदीय क्षेत्र में भी स्वास्थ्य विभाग अन्य जिलों की तरह कागज पर चल रहा इसका पोल तब खुला जब स्वास्थ्य विभाग द्वारा बकायदे इसके लिए जिला सर्विलांस अधिकारी नामित किया है। जिसका प्रभार डॉक्टर शिशिर को दिया गया है। लेकिन यह साहब किसी का फोन नहीं उठाते। पीड़ित व उसके सहयोगी ने जब सम्पर्क किया तो उन्होंने इस तरह की स्थिति से निपटने के लिए कोई भी व्यवस्था न होने का दो टूक जवाब दे दिए। यहां तक की उनको इस बात का अंदाजा था कि मरीज ई परिजन उनसे नोडल के नाते सम्पर्क करेंगे। जिसके कारण उन्होंने फोन ही बंद करना समस्या का समाधान समझा। जिंदगी और मौत के बिच जूझ रहे बजीर को बचाने के लिए परिजन फिर से बीचयू कि तरफ भागे। जहाँ काफ़ी जद्दोजहद के बाद किसी तरह इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। जहाँ अभी ईलाज के पूर्व कागजी कोरमपूर्ति चल रही रही थी कि बाजीर कि दर्दनाक मौत हो गयी।