- आगरा एसएसपी के दौरान डाक्टर के अपरहरण कर्ता पर खुद चलायी थी गोली
- घने जंगल में रियल इंकाउंटर में मारे गयी थे दो बदमाश

News desk : अपराध पर लगाम के नाम पर तो ऐसे पुलिस आये दिन पैर में गोली मारकर अपने सटीक निशानेबाज होने का उदाहरण आये दिन पेश करती रहती है। जिसकी सच कि जांच हों जाय तो फर्द में शामिल सभी एनकाउंटर स्पेशलिस्ट खुद जेल में चले जाय। फिर वही जिनके निर्देशन में अपराध व अपराधियों पर लगाम लगाने कि बात होती है वही पल्ला झाड लेंगे। लेकिन प्रदेश में आधा दर्जन आईपीएस ऑफिसर आज भी है जो अपराधियों से रियल में निपटने का जिगर रखते है। इन अधिकारियों के नाम से अपराध जगत में विचरण करने वालों कि हवा ख़राब हों जाती है।

उन आधा दर्जन से अधिक आईपीएस कि सूची में एक नाम है मुनिराज जी जो तमिलनाडु के धर्मपुरी जिले के रहने वाले है। साधारण परिवार से देश सेवा कि जज्बा लेकर तैयारी शुरू किये। जो उत्तर प्रदेश के 2009 बैच के आईपीएस अधिकारी बन गये।
2014 में कप्तान के रूप में चंदौली से पहली पोस्टिंग पाने वाले मुनिराज जी ने अपने ईमानदारी का लोहा बनवाया था। साईकिल से थानों पर औचक निरीक्षण को पहुंच जाना यहां चर्चा का विषय रहा। पैसे के लिये बलात्कार का झूठा केस लगाने वाली महिला के आरोपों का खुद ही जांच किये। जिसके बाद इन्होने अपने कार्यकाल में आरोपी महिला को जेल भेजवाया था। जिसकी प्रदेश में काफ़ी सराहना कि गयी थी। अलीगढ़, आगरा, पीलीभीत, अयोध्या जैसे जिलों में एसएसपी रहते हुए कई मुठभेड़ आदि इनके कार्यकाल में हुआ। लेकिन आगरा एसएसपी के दौरान खुद इन्होने माफियाओं का रियल एनकाउंटर किया।

बदमाश अक्षय उर्फ़ चंकी पाण्डेय जगनेर के कछपुरा जंगल में इनके पिस्टल से ढेर हुआ था। हुआ यह था कि आगरा के एक नर्सिंग संचालक को महिला के साथ मिलकर बदमाशों ने अपहरण कर लिया था। फिर डॉक्टर को छोड़ने के लिये पांच करोड़ कि फिरौती मांग रहे थे। इन अपहरण कर्ताओं के खिलाफ सर्च अभियान चलाकर पुलिस ने दोनों बदमाशों बदन सिंह व अक्षय पाण्डेय को मार गिराया था। वर्तमान समय में मुरादाबाद के डीआईजी के पद पर तैनात मुनिराज जी को गृह मंत्रालय ने गैलेंट्री सम्मान से नवाज़ा है।