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जाते जाते साहब एसी व सोफा भी ले गए, सरकारी नोटिस जारी होते ही बढ़ी बेचैनी

  • इन्वर्टर बैटरी के साथ साथ लोहे कि कडाही तक उठा ले गए साहब
  • लेटर जारी होने के बाद लखनऊ से गाड़ी करके समान भेजना पड़ा स्टोर



Chandauli news : प्रदेश में सरकार बदलने के बाद जब मुख्यमंत्री आवास खाली हुआ था उस समय टोटी तक खोलने कि बात कुछ दिन तक राजनितिक मुद्दा रहा। लेकिन चंदौली में भी कुछ ऐसा ही हुआ। चेहरे पर शराफत का मुखौटा लगाए बैठे हैं, जाते जाते सरकारी अमानत भी लूट ले गए हैं। पुलिस विभाग में जिले से एक अधिकारी का ट्रांसफर लखनऊ हुआ। काफ़ी दिनों तक तो इस स्थानांतरण को रुकवाने के लिए सपरिवार प्रयासरत रहा। लेकिन शासन से राहत न मिलने पर मायूस होकर जिला छोड़ने वाले अधिकारी ने लखनऊ के मुख्यमंत्री आवास कि तरह खोखला कर गए।
बकायदे थानों से सुविधा लेने वाले इस साहब ने जाते जाते भी थाने से बेगारी कराने से पीछे नहीं हटे। ट्रांसफर के बाद से लगभग एक सप्ताह तक विदाई समरोह के नाम पर पति पत्नी ने गिफ्ट बटोरा उसे पहुंचाने के लिए मालवाहक कि आवश्यकता पड़ गयी। थाना स्तर से व्यवस्था हुआ। अब मालवाहक थोड़ा जरूरत ही ज्यादा ही बड़ा था। फिर क्या था जिम्मेदार पदों पर होने के बाद भी नादानी कर गए। आवास पर सुविधा के लिए लगे सोफा, इन्वर्टर बैटरी, एसी सब खोलावा कर भर ले गए। यहां तक कि जरूरत से ज्यादा पारिवारिक सदस्यों के रहने के कारण एक बड़ी कड़ाही लोहे कि व्यवस्था कि गयी थी। उसे भी उठा ले गए।
सूत्रों कि माने इस बात का राज तब खुला जब नए वाले साहब उनके स्थान पर पहुंचे तो देखे कि लखनऊ में टोटी चोरी तो यहां सोफा और बैटरी चोरी है। आरआई से आवास ठीक कराने के लिए कहा गया तब आरआई का माथा ही ठनक गया। स्टोर से रिकार्ड चेक हुआ तो पता चला कि सोफा, एसी, इन्वर्टर, डबल बेड सब व्यवस्था किया गया हैं। फिर क्या था साहब के इस नादानी पर कागज का घोड़ा मुख्यालय तक दौड़ा दिया गया। अपर पुलिस अधीक्षक ऑपरेशन के हस्ताक्षर से तैयार कागज का घोड़ा सरपट बिना लगाम के इतनी तेजी से दौड़ा कि साहब के लखनऊ आवास का साज सज्जा करने से पहले ही दस्तक दे दिया। जहाँ लाल घोड़े को देखकर जमीन ही खिसक गयी। तपती दोपहरी में एक तो एसी अभी कार्टून से बाहर नहीं आ पाया था जिससे माथे का पसीना सूख पाए। तब तक विभागीय तकादा पीछे पड़ गया। अब बेचारे करें क्या चार दिन पूर्व मुख्यालय पहुंचे बिना जान पहचान के पुनः गाड़ी करके समान को आपधापी में भेजवाना पड़ा। उसमें भी अभी सेंटर टेबल का तकादा जारी हैं।

मृत्युंजय सिंह

मैं मृत्युंजय सिंह पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र में विभिन्न राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त न्यूज़ सम्प्रेषण के डिजिटल माध्यम से जुडा हूँ.मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की ख़बरों को प्रमुखता से उठाना एवं न्याय दिलाना है.जिसमे आप सभी का सहयोग प्रार्थनीय है.

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