- धनंजय सिंह, सुशीलसिंह, बृजभूषण शरण व विनीत सिंह का नाम भी शामिल

Chandauli news : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शस्त्र प्रदेश में शस्त्र लाइसेंसों जारी करने के मामले को. संज्ञान में लिया है। जिसमें आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को लाइसेंस जारी किए जाने पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार तथा सभी जिलों के पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों से विस्तृत जवाब तलब किया है। इसमें प्रदेश के 19 बाहुबलियों खासकर रघुराज प्रताप सिंह राजा भैय्या, धनंजय सिंह, सुशील सिंह, बृजभूषण सिंह, विनीत सिंह, अजय मरहद, सुजीत सिंह बेलवा, उपेन्द्र सिंह गुड्डू, पप्पू भौकाली, इन्द्रदेव सिंह, सुनील यादव, फरार अजीम, बादशाह सिंह, संग्राम सिंह, सुल्लू सिंह, चुलबुल सिंह, सनी सिंह, छुन्नू सिंह, तथा डॉ. उदय भान सिंह को लाइसेंस जारी करने का विवरण माँगा गया है।
अदालत ने कहा कि गृह विभाग के संयुक्त सचिव द्वारा 20 मई 2026 को दाखिल हलफनामे से स्पष्ट हुआ है कि प्रदेश के 75 जिलों के डीएम, पुलिस आयुक्त और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक समय-समय पर जारी सरकारी आदेशों तथा आर्म्स एक्ट, 1959 एवं उसके नियमों का सही ढंग से पालन नहीं कर रहे हैं। जबकि 23 मार्च 2026 के आदेश में लाइसेंस जारी करने, नवीनीकरण और हस्तांतरण के मामलों में अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए थे।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लाइसेंस धारकों का जिला, थाना और नामवार विवरण प्रस्तुत किया जाए। साथ ही यह भी बताया जाए कि ऐसे लोगों के परिवार के अन्य सदस्यों के पास भी हथियार लाइसेंस हैं या नहीं। अदालत ने कहा कि सुशासन और कानून के शासन के लिए प्रशासनिक कार्यवाही में निष्पक्षता और गैर-भेदभाव अनिवार्य है। कोर्ट ने कहा कि स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों, जो व्यापक सामाजिक एवं राजनीतिक प्रभाव रखते हैं इनके संबंध में विवरण उपलब्ध नहीं कराया है। ऐसे व्यक्तियों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाई गई हैं। स्थिति को स्पष्ट करने और किसी प्रकार की अस्पष्टता दूर करने के लिए आवश्यक है कि इनकी जानकारी भी दी जाए।
कोर्ट ने आदेश की प्रति प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह), सभी जिलाधिकारियों तथा सभी पुलिस आयुक्तों और एसएसपी को भेजने का निर्देश दिया है। साथ ही अधिकारियों को व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल कर यह बताने को कहा गया है कि उन्होंने कोर्ट से कोई महत्वपूर्ण जानकारी नहीं छिपाई है। मामले की अगली सुनवाई 26 मई 2026 को होगी।