घटना के दिन बार बार फोन कर बनाया गया दबाव, महिला सदस्य हट गयी थी पीछे
वीडियो जारी होने के बाद महिला आयोग कि अध्यक्ष ने लिया संज्ञान, मुख्यमंत्री से करेंगी शिकायत

Chandauli news : एक तरफ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री महिला सुरक्षा को लेकर काफ़ी गंभीर है। गंभीरता का अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि सरकार पिछले तीन माह से मिशन शक्ति कार्यक्रम के तहत पुलिस टीम को लगाए हुए है। थाना से महिला कांस्टेबल पुलिस के लोग महिलाओं को उनके अधिकार के विषय में जागरूक कर रहे है। लेकिन एक तरफ यह अभियान चल रहा दूसरी तरफ पुलिस के सामने ही महिला आयोग कि सदस्य के साथ बदसलुकी हो गया और पुलिस मुकदर्शक बनी रही। यहां भी महिला आयोग के सदस्य के शिकायती पत्र का इंतजार किया जाने लगा। अब अन्य महिलाओं कि तरह पुलिसिया पचड़े में पड़ने से बचने के लिए या फिर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के दबाव में महिला आयोग कि सदस्य ने शिकायत नहीं किया। लेकिन आयोग कि सदस्य के साथ हुए बदसलूकी का वीडियो वायरल हो गया है। जिसे महिला आयोग कि अध्यक्ष बबिता चौहान ने संज्ञान में लिया है।
17 दिसम्बर के दिन महिला आयोग कि सदस्य सुनीता श्रीवास्तव जिले में महिलाओं का फरियाद सुनने के लिए आयी हुयी थीं। जहाँ उन्होंने डॉक बंगला स्थित गेस्ट हॉउस में फरियाद सुना। इसके बाद वह कस्तूरबा का भ्रमण करने निकल गयी। निरीक्षण के दौरान महिलाओ से बातचीत करने कि ईच्छा प्रकट कीं। जिसके बाद उनके साथ चल रहे सरकारी अधिकारियों ने उन्हें के जी नंदा पहुंचा दिया। जहाँ पहुंचने के बाद वहाँ के डॉक्टर, उनके भाई ने आयोग के सदस्य को सीओ सदर, इंस्पेक्टर सदर व महिला एसओ के सामने ही बदसलूकी कर दिया। इधर पुलिस मुकदर्शक बनी रही। आयोग के सदस्य के साथ हुए बदसलूकी कि जानकारी होते ही शुभ चिंतको ने मामले को संभालने के लिए उच्च स्तर के नेताओं से सम्पर्क किये। जिसका असर रहा कि महिला आयोग कि सदस्य अपने साथ हुए बदसलुकी कि शिकायत से ही पीछे हट गयीं।
इसके बाद तो डॉक्टर और उत्तेजित होते हुए कोतवाली पहुंचकर उनके खिलाफ ही कार्यवाही कि मांग करते हुए हंगामा ही नहीं बल्कि तोड़फोड व पुलिए कर्मियों से हाथपायी किये। पुलिस इस मामले में मुकदमा तो दर्ज कि लेकिन अब तक कोई कार्यवाही नहीं कर पायी। अब भाजपा महिला आयोग सदस्य के साथ बदसलुकी करने वाले का सरकार के पूर्व मंत्री के साथ फोटो वायरल हो रहा है। सूत्रों कि माने तो पुलिस गिरफ्तारी का दबाव न बनाने पाये, मामले को रफा दफा कराने के लिए उच्चधिकारियों से वार्ता करने कि सिफारिश के बाबत सकारात्मक बात चीत हुआ। इसके लिए 18 घंटा मरीजों को ईलाज करने कि बात कहने वाले को 4 से 06 घंटा का समय ब्यतीत करना पड़ा था।