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आरपीएफ और जीआरपी के तश्करी के खेल पर अधिकारी नहीं कस रहे नकेल

डीडीयू मंडल के जपला पर तैनात सिपाही डीडीयू स्टेशन पर करता है ड्यूटी

तेल, कोयला व शराब तस्करों तक गहरी पैठ




Chandauli news: सिविल पुलिस गौ तश्कर शराब तश्कर या फिर कारखास बनने कि जानकारी पर पुलिस अधीक्षक आदित्य लांग्हे किसी न किसी बहाने ऐसे लोंगो को निपटा देते है। लेकिन रेलवे में ऐसे कारखासों कि चांदी है। यहां कमांडेंट और इंस्पेक्टर के ठीक ठाक तालमेल से यह धंधा फल फूल रहा है।


रविवार को धंधे में लोचा होने पर यह वर्दीधारी आपस में ही ऐसे भीड़ गये जैसे मृत पशुओं के शरीर पर कुत्ते लगे होते है और उमें कोई और कुत्ता हस्तक्षेप कर दे। वैसे ही यहां रेलवे के सुरक्षा में लगे जीआरपी व आरपीएफ के टीम के सिपाही आपस में गुरिल्ला युद्ध किये।
सूत्रों कि माने तो आरपीएफ कमांडेंट के सीपीडीएस टीम सदस्य भगवान सिंह सिपाही कम कारखास ज्यादा है। पिछले कई वर्ष से यही पर ड्यूटी कर रहे है। चार साल से उपर तक एक ही थाने पर होने के बाद ट्रांसफर नीति के तहत डीडीयू मंडल के जपला स्टेशन पर ट्रांसफर कर दिया।

इसके ट्रांसफर होने के बाद भगवान के साथ साथ प्रभारी भी आहत हुए थे। जिसका परिणाम रहा कि ट्रांसफर के तुरंत बाद ही आरपीएफ कमांडेंट ने भगवान सिंह को सीपीडीएस टीम में बुला लिया। तब से भगवान सिंह डीडीयू स्टेशन पर ही ड्यूटी कर रहे। यह विभाग के लिए सोने का अंडा देने वाला मुर्गी जैसा है। डीडीयू में पुनः वापसी के बाद सीपीडीएस बनाकर लगा दिया गया. जिसके बाद तशकरी का खेल जारी है।

रविवार को भी वसूली के चक़्कर जीआरपी व्रज टीम के प्रभारी ऋषि सिंह व सीपीडीएस के भगवान आपस में इस बात पर भीड़ गये कि बैग में शराब भरा था। जो जीआरपी थाने के आमने खडे थे। दूसरी तरफ से आये भगवान व उनकी टीम ने झोला देखकर रोक रोक शुरू किया। जो सिस्टम का हिस्सा बताकर छोड़ने के लिए कहा। लेकिन बात नहीं बनी। इसी बात को लेकर भगवान और ऋषि में मारपीट हुआ।

मृत्युंजय सिंह

मैं मृत्युंजय सिंह पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र में विभिन्न राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त न्यूज़ सम्प्रेषण के डिजिटल माध्यम से जुडा हूँ.मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की ख़बरों को प्रमुखता से उठाना एवं न्याय दिलाना है.जिसमे आप सभी का सहयोग प्रार्थनीय है.

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