लगातार थाना प्रभारियों कि नकेल कसने के बाद भी नहीं हो रहा सुधार
डबल आईपीएस अधिकारी कर रहे मॉनिटरिंग फिर भी फिसड्डी

Chandauli news: जिले कि क़ानून ब्यवस्था बेपटरी हो गयी है। इसके सुधार के लिए दो दो आईपीएस अपनी पूरी ऊर्जा लगा रहे है। लेकिन इसके बाद भी डबल इंजन का यह जिला 16 थानों के डब्बे को पटरी पर दौडा नहीं पा रहे है। यह बात प्रदेश स्तर के मानिटरिंग में सामने आया है। जिला सीएम डैश बोर्ड में 66 वें स्थान पर पहुंच गया।

जनसुनवाई करते पुलिस अधीक्षक
जुलाई माह में 09 दिन में तीन तीन हत्या, लूट व चोरी कि ताबड़तोड़ घटना घटित हुआ. जिसके बाद अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ा। हलांकि क्राइम कंट्रोल के नाम पर तीनों घटनाओं का पुलिस ने खुलासा कर दिया। लेकिन रैकिंग कम नहीं हुआ. कारण कि थाना प्रभारी अब कार्य करने में रूचि नहीं ले रहे। थाना प्रभारी के अलावा हलका इंचार्ज मठाधीश टाइप के है। जिस मामले में उनका फायदा हो रहा है उसमें रूचि ले रहे है। अन्यथा प्रार्थना पत्रों को दबाये पड़े है। पीड़ित पुलिस अधीक्षक के यहां प्रार्थना पत्र दे रहे है लेकिन कार्यवाही नहीं हो रही। शिकायत कर्ता बार बार प्रार्थना पत्र दे रहे लेकिन कार्यवाही नहीं हो रही। पुलिस अधीक्षक का डर समाप्त हो गया है। जबकि थानों से प्रतिदिन जनसुनवाई में एक एक दरोगा या फिर इंस्पेक्टर अपराध को तलब किया जा रहा। यही नहीं सूत्रों कि माने तो लगातार प्रतिदिन पुलिस अधीक्षक एक घंटा गूगल के माध्यम से थाना प्रभारियों के साथ बैठक करते है. दो बजे के बाद अपर पुलिस अधीक्षक आईपीस अधिकारी भी नकेल कस रहे। वावजूद इसके मठाधीश टाइप के थाना प्रभारी अपने मदमस्त चाल में चल रहे।
जनसुनवाई में अधिकारियों कि फ़ौज फिर भी मायूस होते है फरियादी
थानों पर सुनवाई न होने के बाद न्याय के लिए पुलिस अधीक्षक के यहां गुहार लगाने के लिए फरियादि आते है। एसपी के जनसुनवाई में पुलिस अधीक्षक, अपर पुलिस अधीक्षक व सीओ स्तर के अधिकारी बैठे रहते है. लेकिन फरियादि अपनी बात कह नहीं पाते है। कारण कि उन्हें पुलिस अधीक्षक के यहां पहुंचने में कई चैनलों से गुजरना पड़ता है। पहले जनता दर्शन में आने के साथ ही उन्हें पुलिसिया ब्यवहार का सामना करना पड़ता है। इसके बाद उनके शिकायती पत्र पर संबन्धित थाने से पूछताछ किया जाता है। अब जिस रोग से पीड़ित होकर (थाने से पीड़ित व्यक्ति शिकायत पहुंचा है) वहाँ उसी थाने से उसके शिकायत पर पूछताछ हो रहा। दरोगा कहानी बता देता है। अब पीड़ित अपना माथा पटाकता रहे लेकिन साहब के सामने वहीं बात जाएगी जो दरोगा कहानी बताया है। यहां से डॉक मुने प्रार्थना पत्र चढ़कर थाने पहुंचा दूसरे दिन वहीं कहानी वाली रिपोर्ट आ गयी। आईजीआरएस का पोर्टल संतुस्ट हो गया। पीड़ित अब भी त्रिशंकु कि तरह लटक रहा है।