पीड़िता ने डॉक्टर से किया शिकायत तो महिला डॉक्टर के पति ने धमकाया
पीड़ित का आरोप सीएमओ से किया शिकायत तो डॉक्टरों के पैनल ने बदलाव दिया रिपोर्ट

Chanadauli news: एमसीएच हेरिटेज विंग में तैनात महिला चिकित्सक डॉ. अंजुलता यादव उर्फ अंजू यादव के लापरवाही का एक मामला सामने आया। महिला का ऑपरेशन करने के बाद तौलिया पेट में ही छोड़ दी। ज़ब पीड़िता को परेशानी होने लगी तो उसे अपने निजी चिकित्सालय ऐ ईलाज कराने का दबाव दिया. लेकिन इसके बाद भी आराम न होने पर पीड़िता को आराम नहीं हुआ। जिसके बाद वह वाराणसी के एक निजी अस्पताल में ऑपरेशन कराकर ईलाज कराई। ज़ब इसकी शिकायत पीड़िता ने डॉक्टर अंजू से किया तो उसके पति सकलडीहा चिकित्साधीक्षक ने पीड़िता व उसके परिवार को धमकाया। अंततः पीड़िता ने न्यायालय का दरवाजा खतखटाया। अब न्यायालय ने मुकदमा दर्ज कर जांच का आदेश दिया है।

बलुआ थाना क्षेत्र के हृदयपुर गांव निवासी मनीष कुमार यादव ने आरोप लगाया है कि उनकी पत्नी पत्नी रंजना यादव को प्रसव पीड़ा 23 अक्टूबर 2024 को हुआ. जिसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चहनियां में भर्ती कराया गया। जहाँ से उसे एमसीएच हेरिटेज चंदौली रेफर किया गया। जहां डॉ. अंजुलता यादव की देखरेख में ऑपरेशन हुआ और बच्ची का जन्म हुआ। ऑपरेशन के कुछ दिन बाद ही प्रसूता को उल्टी, पेट दर्द और बुखार होने लगा। डॉक्टर ने इसे सामान्य बताते हुए टाल दिया। 30 अक्टूबर को महिला को डिस्चार्ज कर दिया गया, लेकिन घर लौटने के बाद भी उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। जिसके बाद 20 नवंबर को डॉ. कविता यादव की सलाह पर अल्ट्रासाउंड कराया। जिसमें गड़बड़ी देख सब दंग रह गये। पेट मुने तौलिया दिखा। जिसके बाद पुनः ऑपरेशन की सलाह दी गई। इस पर जब परिजन ने डॉ. अंजुलता से संपर्क किया तो उन्होंने इसे सामान्य बताकर अनदेखा कर दिया। इसके बाद डॉ अंजू यादव ने अपने रेज हॉस्पिटल में बुलाकर भी उपचार किया। लेकिन फायदा नहीं हुआ।
इसके बाद पीड़ित पक्ष ने अलग-अलग अस्पतालों में इलाज कराया। 17 जनवरी को पीडीडीयू नगर स्थित एक अस्पताल में सर्जरी की सलाह दी गई। आखिरकार वाराणसी के एक निजी अस्पताल में ऑपरेशन किया गया, जहां महिला के पेट से तौलिया निकाला गया। इस दौरान संक्रमण फैलने से आंत भी सड़ चुकी थी। इतना झेलने के बाद ज़ब पीड़िता ने सीएमओ से शिकायत किया तो सीएमओ ने चिकित्सक के प्रभाव के कारण आना कानी करने लगे। हलांकि मामला स्वजातीय होने के कारण सीएमओ को भी लगा कि समझौता होना ही है तो उन्होंने एक जांच के नाम कोरमपूर्ति करा दिया। जांच टीम व डॉक्टरों के आपसी सांठ गांठ एस कदर सेट खाया कि पीड़ित के यहां मौजूद कागज जांच रिपोर्ट, ऑपरेशन आदि ही बदला दिए। पीड़ित भी भ्रस्ट ब्यवस्था से टूट चुका था. जिसके बाद उसे न्यायालय से न्याय कि उम्मीद जगी। पूरे कागजात को जज ने देखा उसके बाद बलुआ पुलिस को आदेश दिया कि आरोपी डॉक्टर व उसके पति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच करें।