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तेल कटिंग में अलीनगर के कारखास का हाथ, आधा दर्जन संगीन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा

छापेमारी कि जानकारी होते ही थाने से भाग गया कारखास

प्रभारी निरीक्षक के तहरीर पर 12 के खिलाफ नामजद दर्ज हुआ एफआईआर




Chandauli news : अलीनगर में चर्चित तेल कटिंग में अलीनगर के कारखास कि संलिप्तता पायी गयी है। इस बात का खुलासा हिरासत में लिए एक दर्जन तेल तस्करों से पूछताछ में उजागर हुआ है। तेल तस्करों से कारखास रोशन यादव मोटी रकम लेता था। यहां तक कि उसे एक टीयूवी चार पहिया भी इन तस्करों ने उपलब्ध कराया है। हलांकि छापेमारी कि जानकारी होते ही कारखास ने सिपहसलाह के कहने पर मोबाईल बंद कर थाना छोड़ दिया। पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ के बाद ज़ब उजागर हुआ तो 12 नामजद लोंगो के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। इसमें कोचस दिनारा के अनवर, अलीनगर के दानिश, पंकज, प्रहलाद चौहान, राकेश, असलम, प्रमोद, शेरू, सुहैल, चंदा व राजू के खिलाफ अभियोग पंजीकृत किया गया है। इसके साथ मौके पर पकड़ी गयी दो ट्रेंकर भी पुलिस कि फर्द में है। इस मामले में 11 को जेल भेज दिया गया जबकि विभागीय कारखास को हाईकोर्ट जाने के लिए छूट दे दिया गया।

चक्रघट्टा पोस्टिंग के बाद नहीं हुयी थी रवानगी :

अलीनगर में वर्षो से पोस्ट कमलेश पाण्डेय, रोशन यादव तेल कटिंग व शराब का काम देखते है। जबकि गौ वंश व अन्य कार्य के लिए दो कारखास अलग है। इसमें पिछले वर्ष पुलिस अधीक्षक ने तेल कटिंग कि जानकारी होने पर तत्कालीन सीओ डीडीयू नगर रहे राजीव सिसोदिया से छापेमारी कराया था। उस समय थाने से चंद कदम कि दूरी पर स्थित लोकेशन पर पहुंचने में सीओ को प्रभारी व कारखासो ने तीन घंटे तक छकाया। अंततः सीओ को गूगल मैप का सहारा लेकर मौके पर पहुंचना पड़ा था। उस दौरान भी लगभग 1000 लीटर तेल एक हाते में पकड़ा गया था। जो वर्षो से कागज में सीज है उसमें तेल कटिंग कि कार्यवाही हो रही थी। उस दौरान विभागीय कार्यवाही के नाम पर कमलेश पाण्डेय को नौगढ़ तो भेजा गया लेकिन उनकी आत्मा अलीनगर में भटकती रही। किस स्थान से कितना रुपया आता है यह सटीक जानकारी आज भी कमलेश अपने पास ही रखते है। कुछ स्थान पर बाय तरह से यह कार्य शुरू हुआ है जो रोशन के संरक्षण में फल रहा है। एस मामले में किरकिरी होने के बाद भी एक वर्ष तक प्रभारी को हटाया नहीं गया। सूत्रों कि माने तो एक मामले में ठीक ठाक संलिप्तता अपर पुलिस अधीक्षक ने पकड़ा था। जिसके बाद यहां से प्रभारी को हटाकर पीआरओ बना दिया गया। उसी दौरान रोशन का ट्रांसफर चकरघट्टा हो गया। लेकिन पीआरओ के प्रति रोशन कि निष्ठा बरकरार रहा। जिसका लाभ मिला। चकरघट्टा में पोस्ट होने के बाद भी रवानगी रोक दी गयी। सूत्रों कि माने तो ठीक से जांच हो जाय तो इसमें तीन स्टार से लेकर मीडिया व राजनैतिक पकड़ वाले कि भी संलिप्तता मिलेगी।

मृत्युंजय सिंह

मैं मृत्युंजय सिंह पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र में विभिन्न राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त न्यूज़ सम्प्रेषण के डिजिटल माध्यम से जुडा हूँ.मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की ख़बरों को प्रमुखता से उठाना एवं न्याय दिलाना है.जिसमे आप सभी का सहयोग प्रार्थनीय है.

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