विपक्षी केवल किसानो को बरगला कर कर रहे राजनीति
जिले के चारो विधानसभा में जमीन का हो रहा सर्वें

Chandauli news : प्रदेश कि सरकार जिले का विकास करना चाहती है इसके लिए जमीन कि आवश्यकता है। मुख्यमंत्री जी के लिए चंदौली पहली प्राथमिकता है। यह इसलिए क्योंकि प्रधानमंत्री जी के संसदीय क्षेत्र से सटा यह जिला है। लेकिन विकास के साथ ही किसानों का हित सरकार कि सर्वोपरि है। उक्त विचार सैदराजा विधायक सुशील सिंह ने बरहनी में जुटे किसान पंचायत में कहा।

बरहनी विकास खंड में लगभग 6000 एकड़ जमीन सरकार द्वारा अधिग्रहण किये जाने कि जानकारी के बाद किसान महापंचायत रखें थे। जबकि सरकारी तंत्र ने जमीन अधिग्रहण कि बात सिरे से ख़ारिज कर दिया. लेकिन इसके बाद भी यह पंचायत हुआ। उधर ऐसी जानकारी होने पर विपक्ष अपनी रोटी सेकना शुरू कर दिया।

किसानों को एक एक कर समझाने के बजाय किसान पंचायत में खुद विधायक पहुंच गये। यहां पर इकट्ठा हुए किसानों ने अपनी दर्द को उजागर करते हुए गमले में धान की पौधा लगाएं उसपर लिखा था खतरे में धान का कटोरा उसे स्मृति चिन्ह बना कर विधायक सुशील सिंह को दिया इसके साथ ही पत्रक भी सौपा।

विधायक ने कहा कि चंदौली के विकास को लेकर मुख्यमंत्री जी ने कहा कि चंदौली में कोई जमीन दिला सकते हो हमने कहा कैसी जमीन चाहिए। हमारा क्षेत्र है किसानों का क्षेत्र है।समतल क्षेत्र है हमारे जनपद में नौगढ़ क्षेत्र है चकिया क्षेत्र है।जो पहाड़ी क्षेत्र है। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हमारे पास बड़ी बड़ी कंपनिया आ रही है ।हम चाहते हैं बनारस से सटा चंदौली जनपद है। और कम्पनियां सोनभद्र जाना चाहती है। जिले के विकास को लेकर सर्वे तो चारों विधानसभा में हो रहा है। लेकिन बैठक हमारे यहां हो रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार किसानों कि हित को सर्वोपरि रखा है। उन्होंने कहा कि कपसेठी से बाबतपुर डबल लेन सड़क बनी थी।जो अखिलेश यादव के सरकार में बनाया गया था। और सड़क की लागत पचास करोड़ रुपए थी। अखिलेश यादव सरकार ने मुआवजा किसानों को नहीं मिला था ।जब हमारी सरकार बनी 2017 में वहां के किसानों की बात विधायक डाक्टर अवधेश सिंह ने मुख्यमंत्री जी तक पहुँचाया। उसके बाद सर्वे कराकर मुआवजा दिलाया गया। उन्होंने कहा आप का यह बेटा किसानों की उपजाऊ जमीन नहीं जानें देगा। इस दौरान किसान यूनियन के ब्लाक अध्यक्ष शिवबच्चन सिंह, तहसील अध्यक्ष सुमंत सिंह अन्ना, संतविलाश सिंह, मृत्युंजय सिंह दिप्पू, महेश्वर सिंह, डाक्टर समर बहादुर सिंह, श्रवण सिंह,दिनानाथ श्रीवास्तव, अध्यक्षता विजय नारायण सिंह संचालन रतन सिंह ने किया।