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महिलाओं के लिए कृषि में एआई : पूर्वांचल के किसानों के लिए नई संभावनाएँ: डॉ अखिलेश

Chandauli news : भारत की कृषि व्यवस्था तेजी से तकनीकी बदलाव के दौर से गुजर रही है। आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित तकनीकें खेती को अधिक उत्पादक, टिकाऊ और लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। विशेष रूप से महिलाओं के लिए यह परिवर्तन एक बड़ा अवसर बनकर सामने आ रहा है। यदि इन तकनीकों को सही ढंग से ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँचाया जाए तो यह किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक सुरक्षित बनाने में सहायक हो सकती हैं। उक्त बातें वरिष्ठ क़ृषि सलाहकार डॉ अखिलेश कुमार सिंह ने बताया।

उन्होंने बताया की भारत में कृषि कार्यबल का लगभग 43 प्रतिशत हिस्सा महिलाएँ हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में खेती, पशुपालन, बीज संरक्षण और खाद्य प्रसंस्करण जैसे कार्यों में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद जमीन के स्वामित्व, आधुनिक तकनीक और संस्थागत ऋण तक उनकी पहुँच सीमित है। यही कारण है कि कृषि में महिलाओं की क्षमता का पूरा उपयोग अभी तक नहीं हो पाया है। यदि हम उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र की बात करें तो यहाँ की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है। विशेष रूप से Chandauli जिला, जिसे अक्सर “धान का कटोरा” कहा जाता है, यहाँ के किसान मुख्य रूप से धान, गेहूँ और दलहनी फसलों की खेती करते हैं। इस क्षेत्र में खेती के अधिकांश कार्यों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिलती है, चाहे वह रोपाई हो, निराई-गुड़ाई हो या कटाई का कार्य।

नई कृषि तकनीकों के आगमन से किसानों के लिए कई नई संभावनाएँ खुल रही हैं। सैटेलाइट आधारित फसल निगरानी, मोबाइल ऐप के माध्यम से मौसम की जानकारी और एआई आधारित फसल सलाह किसानों को समय पर निर्णय लेने में मदद कर सकती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी खेत में कीट प्रकोप या पोषक तत्वों की कमी की जानकारी पहले ही मिल जाए, तो किसान समय रहते उपचार कर सकते हैं और फसल नुकसान को कम कर सकते हैं। पूर्वांचल के जिलों में छोटे और सीमांत किसानों की संख्या अधिक है। ऐसे किसानों के लिए डिजिटल तकनीकें विशेष रूप से उपयोगी हो सकती हैं, क्योंकि इससे कम लागत में बेहतर कृषि प्रबंधन संभव हो सकता है। यदि महिलाओं को मोबाइल आधारित कृषि सलाह, डिजिटल प्रशिक्षण और बाजार जानकारी उपलब्ध कराई जाए तो वे परिवार की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

हालाँकि, डिजिटल कृषि के विस्तार में कुछ चुनौतियाँ भी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी इंटरनेट कनेक्टिविटी, स्मार्टफोन उपयोग और डिजिटल साक्षरता की कमी देखी जाती है। महिलाओं के पास मोबाइल फोन और इंटरनेट की पहुँच पुरुषों की तुलना में कम है। इसलिए आवश्यक है कि डिजिटल कृषि योजनाओं को लागू करते समय इन सामाजिक और तकनीकी बाधाओं को भी ध्यान में रखा जाए। कृषि में नई तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए Government of India और राज्य सरकारें विभिन्न कार्यक्रम चला रही हैं। इसके साथ ही Food and Agriculture Organization, एशिया डेवलपमेंट बैंक ,विश्व बैंक जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थान भी जलवायु-स्मार्ट कृषि और डिजिटल सलाह सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहे हैं।

जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम की अनिश्चितता बढ़ती जा रही है। कभी असमय वर्षा, कभी सूखा और कभी अत्यधिक तापमान किसानों के लिए नई चुनौतियाँ पैदा कर रहे हैं। ऐसे समय में एआई आधारित मौसम पूर्वानुमान और फसल सलाह प्रणाली किसानों को समय पर चेतावनी देकर नुकसान को कम करने में मदद कर सकती है। यदि उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों, विशेष रूप से चंदौली जैसे कृषि प्रधान जिलों में महिलाओं को डिजिटल कृषि प्रशिक्षण, तकनीकी संसाधन और बाजार तक पहुँच उपलब्ध कराई जाए, तो यह क्षेत्रीय विकास के लिए एक नई दिशा बन सकता है। महिलाओं की भागीदारी को केंद्र में रखकर तैयार की गई कृषि नीतियाँ न केवल उत्पादन बढ़ाएँगी बल्कि ग्रामीण समाज में आर्थिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा देंगी।

अंततः यह कहा जा सकता है कि कृषि में कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल एक तकनीकी परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण भारत के सामाजिक और आर्थिक विकास का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है। यदि महिलाओं को इस परिवर्तन का सक्रिय भागीदार बनाया जाए, तो पूर्वांचल और पूरे देश की कृषि व्यवस्था अधिक मजबूत और समृद्ध बन सकती है।

मृत्युंजय सिंह

मैं मृत्युंजय सिंह पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र में विभिन्न राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त न्यूज़ सम्प्रेषण के डिजिटल माध्यम से जुडा हूँ.मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की ख़बरों को प्रमुखता से उठाना एवं न्याय दिलाना है.जिसमे आप सभी का सहयोग प्रार्थनीय है.

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