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एसपी के आदेश को ठेंगे पर रखती है महिला थाना प्रभारी

पीड़ितों कि समस्या पर नहीं लेती रूचि, पीड़ित एसपी के यहां लगातार लगा रहे गुहार

महिला थाना से सबसे अधिक असंतुस्ट है फरियादि


Chandauli news: थानों पर फरियादियों कि बात नहीं सुनी जाती है। यह शिकायत लगभग अधिकांश थानों कि है। जहाँ जिसके कारण पुलिस अधीक्षक के यहां फरियादि गुहार लगाने पहुंच जाता है। एसपी ऑफिस से आईजीआरएस पर दर्ज होकर जो प्रार्थना पत्र आता है उसपर थाना प्रभारियों को सुनवाई करनी पड़ती है। लेकिन जिले का एक ऐसा थाना जो एसपी के आदेश को ठेंगे पर रखती है। यहां पीड़ित स्वयं आये या फिर एसपी के माध्यम से आये यहां कि थाना प्रभारी उसी मामले में रूचि दिखाएंगी जिसमें उनकी रूचि होंगी। अन्यथा पीड़ित असंतुस्ट होकर टहलता रहे इन्हे कोई फर्क नहीं पड़ता। जिसका नतीजा है कि पुलिस अधीक्षक के यहां महिला थाने के रिपीट फरियादियों कि संख्या अधिक होती जा रही है।
पुलिस अधीक्षक जनता दरबार में फरियाद लेकर आने वाले फरियादियों कि समस्या को सुनकर वीडियो कांन्फ्रेंस के माध्यम से थाना प्रभारियों से पीड़ित को रूबरू कराते है। इसके बाद कार्यवाही करने का निर्देश देते है। जिससे यह कोई न कहने पाये कि उनके सामने प्रार्थना पत्र आया नहीं। इसमें सबसे अधिक शिकायत महिला थाने का रहा। जिसमें सुधार करते हुए पुरे जिले कि समस्या एक ही थाने पर न जाय इसके लिए पुलिस अधीक्षक ने मिशन शक्ति केन्द्र का स्थापना करा दिए। हर थाने पर महिला अपराध पर सुनवाई करनी है। जिससे महिला थाने पर कम शिकायत कर्ता जाएं। लेकिन इसके बाद भी यहां कि स्थिती उसी तरह बनी हुयी है।


केस 1: ताज़ा मामला अलीनगर के भरछा कि पूजा पाल ने ससुराल के उपर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए अलीनगर थाने पर एक प्रार्थना पत्र दिया। जिसे तत्कालीन एस एच ओ ने समझाबुझाकर महिला थाने भेज दिया। पीड़िता को लगा कि महिला थाना प्रभारी उनकी बात सुनेगी लेकिन यहां एसओ कि बजाय उनकी दिवान से पाला पड़ गया। जिससे मामला सुलझने कि बजाय और भी ज्यादा उलझ गया। कारण कि दिवान अपना दिमाग़ उन्ही प्रार्थना पत्र पर लगाती है जो उनके वेतन खाते के वेतन कि बढ़ोत्तरी करने में मदद कर्ता साबित हो।
महिला इसके बाद पुलिस अधीक्षक के जनता दरबार पहुंच गयी। जहाँ से महिला एसओ को प्रार्थना पत्र भेज दिया गया। इसके बाद भी वह पीड़िता के समस्या से अवगत नहीं हुयी। जिसका परिणाम रहा कि दुबारा पुलिस अधीक्षक के यहां गुहार लगायी है।


केस 2: शिकारगंज कि कुसुम ने ससुराल वालों के उपर दहेज के लिए प्रताड़ना देने का आरोप लगाते हुए महिला थाने में प्रार्थना पत्र दी लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुयी। जिसके बाद पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक के यहां गुहार लगाया है।


केस 3: बबुरी उतरौत कि सहना ने भी ससुराल वालों के उपर दहेज के लिए विदाई न कराने का आरोप लगाया है। अब विदाई जैसे छोटे मामले यहां से सुलझ नहीं रहे है। सुलझने के पीछे का कारण है कि थाना प्रभारी मामलो में रूचि नहीं लेती।

मृत्युंजय सिंह

मैं मृत्युंजय सिंह पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र में विभिन्न राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त न्यूज़ सम्प्रेषण के डिजिटल माध्यम से जुडा हूँ.मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की ख़बरों को प्रमुखता से उठाना एवं न्याय दिलाना है.जिसमे आप सभी का सहयोग प्रार्थनीय है.

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