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गजब का समाजसेवा, तीन हजार महीने वाले रूम से प्रतिदिन तीन हजार हो रही वसूली

मुकदमा दर्ज होने के बाद मरीजों की सहानुभूति बटोरते हुए पोस्ट किया जा रहा वीडियो

एक रूम में तीन चौकी, एक -एक हजार है रेट, 10-15 दिन बाद का दिया जा रहा नंबर

मुकदमा दर्ज होते ही पुलिस हंगामा के दौरान वीडियो से शुरू की पहचान




Chandauli news : सदर कोतवाली में हंगामा खड़ा करने वाले के जी नंदा हॉस्पिटल के संचालक सहित 14 नामजद व 150 अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज होते ही यहां के अब्यवस्था का जिन्न बोतल के बाहर आने शुरू हो गए है। वीडियो मे जिसे समाजसेवा का नाम दिया जा रहा जबकि यहां ईलाज के लिए आने वालों का बिना अस्तरा के ही मुंडन कर दिया जा रहा।


वर्षो से घर के आंगन में किलकारी सुनने के लिए लालायित दम्पत्ति आजकल संतान प्राप्ति के लिए ईलाज कराने के जी नंदा हॉस्पिटल पहुंच रहे है। लेकिन यहां पहुंचने के बाद उन्हें आर्थिक व सामाजिक नुकसान का दंश झेलना पड़ रहा है। संतान न होने की बात जो अपने परिवार व नात रिश्तेदारों तक सिमित थी अब वह अस्पताल के वायरल वीडियो से देश दुनिया को पता चल गया। यही नहीं वायरल वीडियो की वजह से कई राज्य की दम्पत्ति यहां जुटने लगे है। जिसके कारण भीड़ काफ़ी हो गया।


भीड़ की स्थिति यह है की सामान्य स्थिति में एक सप्ताह का नंबर दिया जा रहा। ऐसे में गैर जनपद या राज्य से आये लोंगो के रहने व खाने की सबसे ज्यादा समस्या उत्पन्न हो गयी। फिर क्या था पहले से ब्यवसायिक दृस्टि से बनाये गए मकान जिसका तीन हजार महीना के किराए पर कमरा दिया जाता था आज उस कमरे का तीन हजार प्रतिदिन चार्ज लिया जा रहा है। यही कारण है कि अगल बगल वाले भी मस्त हैं। अब सोशल मीडिया पर इस तरह का वीडियो डाला जा रहा है। जैसे मालूम हो कि यहां कितना बडा समाज सेवा का कार्य हो रहा था। जबकि बच्चा कब से नहीं हो रहा है। केवल यह पूछने की ही फीस एक हजार है। उसके बाद साधारण से जांच के नाम पर कम से कम पांच हजार ढीला कर दिया जा रहा था। स्वाभाविक है कि इसके बाद दवा के नाम पर भी कई हजार भिडाया जा रहा था। अब जब पुलिस ने ही संभवतः जिला मुख्यालय के इतिहास में पहली बार कोतवाली में मुकदमा दर्ज करा दिया गया। तब वीडियो में बताया जा रहा है। नेक कार्य करने के लिए हमें परेशान किया जा रहा है।

पहले के किरायेदारों को पकड़ा दी गयी नोटिस :

अस्पताल के बाद यहां लगभग 20-25 कमरे है जो व्यावसायिक दृस्टि से बनाये गए है। इन कमरों में पुलिस, राजस्व सहित अन्य विभाग के किरायेदार तीन हजार रुपया में रखे गए है। लेकिन अब एक कमरे में तीन हजार प्रतिदिन के आ रहे है। जिसके बाद किरायेदारों को कमरा खाली करने का नोटिस पकड़ा दिया गया।

मृत्युंजय सिंह

मैं मृत्युंजय सिंह पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र में विभिन्न राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त न्यूज़ सम्प्रेषण के डिजिटल माध्यम से जुडा हूँ.मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की ख़बरों को प्रमुखता से उठाना एवं न्याय दिलाना है.जिसमे आप सभी का सहयोग प्रार्थनीय है.

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