एकीकृत न्यायालय जैसे भवन प्रदेश के सभी जिलों में होः मुख्यमंत्री
उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और मुख्यमंत्री ने एकीकृत न्यायालय भवन का किया भूमि पूजन

आनन्द सिंह (चीफ एडिटर)
Chandauli news : सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि एकीकृत न्यायालय की परिकल्पना करके उत्तर प्रदेश दूसरे राज्यों के लिए उदाहरण बनेगा। यहां एक ही छत के नीचे जहां जनपद न्यायालय से संबंधित सभी न्यायालय होंगे। वहीं अधिवक्ताओं के लिए अलग सुव्यवस्थित व्यवस्था होगी। मुख्य न्यायाधीश न्यायालय भवन के शिलान्यास भूमिपूजन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि विचार व्यक्त कर रहे थे।

उन्होंने इस तरह के न्यायालय बनवाने की शुरुआत के लिए मंचासीन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार प्रगट किया। न्यायमूर्ति अधिवक्ताओं की तरफ से किसी अभिभावक की भांति यह भी कहे कि इसमें प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भी स्थापित किया जाना चाहिए। जिससे कभी न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं और वादकारियों को कोई परेशानी होने पर उन्हें तत्काल चिकित्सकीय सुविधा मिल सके। इसके साथ महिला अधिवक्ताओं के लिए भी एक अलग महिला बार रुम की व्यवस्था कराने पर बल दिये।

सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के हिन्दी में दिये गये उद्बोधन से हजारों की संख्या में आये अधिवक्ताओं से भरा सभागार तालियों की गडगडाहट से गूंज उठा था। उन्होंने यहां से अन्य जिलों हाथरस,महोबा,अमेठी,शामली और औरेयां में बनने वाले एकीकृत न्यायालय भवनों का भी औपचारिक शिलान्यास किया।
इसके पूर्व सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने भी हिन्दी में विचार व्यक्त करके प्रदेश के अंतिम छोर पर और बिहार प्रदेश से लगे इस जिले के लोगों को चेहरे पर मुस्कान ला दिया। उन्होंने अधिवक्ताओं और वादकारियों की तरफ से वाराणसी में भी इसी तरह का भव्य न्यायालय जिला जेल की 25 एकड की भूमि पर बनवाने की मांग मुख्यमंत्री के समक्ष रखी। मुख्यमंत्री ने इसे स्वीकार करने का संकेत भी दिया। इस पर एक बार हर हर महादेव का उदघोष होने लगा था।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यहां अधिवक्ता न्यायालय भवन के लिए आंदोलन कर रहे थे। हमने उनसे कहा था। बहुत ही भव्य न्यायालय भवन यहां बनेगा। छह जिलों को इसके लिए पायलट प्रोजेक्ट के रुप में लिया गया है। इसके पूर्व उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण भंसाली ने भी विचार व्यक्त किया। आभार उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी ने व्यक्त किया।