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खुशबू किन्नर के फैलाये जाल में फर्जी जेल भेजनें वाले थाना प्रभारी पर मेहरबानी क्यों ?

  • बिना जांच पड़ताल के एक सप्ताह में बना दिया 50 हजार का इनामिया
  • दोनों तरफ से तत्कालीन थाना प्रभारी ने ऐंठी थी मोटी रकम

Chandauli news : मोहरगंज निवासी खुशबू किन्नर को सराय गांव निवासी अभिषेक के परिजनों से रंगदारी मांगने, चहनियां में सड़क जाम करने जैसे अन्य अपराधिक मामले में पुलिस ने जेल भजे दिया। यह तब हुआ ज़ब किन्नर के फर्जी मनगढ़न्त कहानी की शिकायत परिजनों ने मुख्यमंत्री से किया। मुख्यमंत्री ने ज़ब संज्ञान लिया तब मामले की जांच करायी गयी। जिसमें असलियत सामने आयी। जबकि रस्सी को सांप बनाने में माहिर पुलिस बकायदे किन्नर द्वारा बनाये गए आरोपियों में से कुछ को बिस्फोटक के साथ पकड़ने का दावा करते हुए घटना के दूसरे दिन ही जेल भेज दिया। यही नहीं अपराध मुक्त जिला करने के लिए कटिबद्ध वरिष्ठ अधिकारियों को थाना प्रभारी ने गलतफहमी में रखते हुए तेजी इस कदर दिखाया की अन्य आरोपियों पर एक सप्ताह के अंदर ही 50 हजार का ईनाम घोषित करा दिया। खुशबू पर कार्यवाही तो हो गयी लेकिन उसके प्लान में सम्मिलित तत्कालीन थानाप्रभारी सहित अन्य को बचाया जा रहा।

खुशबू किन्नर व अभिषेक के बीच का प्रेम कुछ दिनों से विवाद में बदल गया और यह इस स्तर पर पहुंच गया की किन्नर ने इन सभी के बर्बादी का जिद ठान लिया। सूत्रों की माने तो खुशबू के सानिध्य में आने के बाद से अभिषेक व विकास का आर्थिक कद भी ऊँचा हुआ था। मित्रता दुश्मनी में बदलते ही ऊँचाई के लिए लगायी गयी सीढ़ी को हटाकर जमीन पर गिराने की इरादे मन मस्तिष्क में जगह बना लिया। उसमें कुछ कानून से लेकर राजनैतिक गतिविधियों में सक्रियता रखने वालों से स्वलाभ के लिए खुशबू से जुड़ गए। मना में अपने सबसे नजदीक मित्र को मिटाने की जिद में उन स्वहित के लिए जुड़े लोंगो की बात भी सही लगने लगी। इसके बाद एक से बढ़कर एक प्लान तैयार हुआ घर में विस्फोट से लेकर थाना पुलिस तक के मैंनेजमेंट की सुनियोजित प्लानिंग ने खुशबू को आज जेल तक का सफर तय करा दिया।

खुशबू के जेल जाने के बाद खुला राज दोनों पक्ष से लिए लाखों : घर में विस्फोट को आपराधिक रूप के प्लान के बाद खुशबू की लड़ाई कानूनी हो गयी। अब अपने बजाय कानून का सहारा लिया जाने लगा। मित्र पुलिस का अपराधी बन गया। सूत्रों की माने तो इसी क्रम में तत्कालीन थाना प्रभारी ने हाफ एनकाउंटर के लिए लाखों रूपये लिए थे। लेकिन अपराध जगत से नाम जुड़ने के बाद अभिषेक व विकास ने भी पुलिस के हाथ लगने की बजाय सुनियोजित ढंग से अपने आप को पुलिस के हवाले किया । यही नहीं एनकाउंटर न होने की स्थिति में अभिषेक व विकास की तरफ से भी पैसे लिए गए। इस बात की जानकारी तब हुयी ज़ब अभिषेक के जेल जाने के बाद उसके सहयोगी व शुभेच्छु मिलने थाने में जाने लगे। तब राज खुला की पुलिस तो दुब खास से भी नहीं छुयी। हां मीडिया के सामने लंगड़ाने का नाटक करने के लिए सलाह दिया गया था।

थाना प्रभारी पर खुशबू ने जताई थी नाराजगी : हाफ एनकाउंटर विफल होने के बाद खुशबू व तत्कालीन थाना प्रभारी के बीच तीखी बहस एस बात पर हुयी थी की पैसा के बाद भी एनकाउंटर नहीं किया। जिसपर सफाई में उन्होंने बहुत अधिक पिटाई करने की बात बताया था। लेकिन जेल में मिलने वालों के सामने अभिषेक ने पुलिस से न पीटने का राज वाहवाही में खोल दिया। जो खुशबू तक पहुंच गयी। पुलिस से धोखा मिलने के बाद इसने पुलिस अधीक्षक से लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री से भी मुलाक़ात की। यही नहीं प्रशासनिक मदद मिलती रहे इसके लिए पिछले दिनों चहनियां में आरएसएस के एक कार्यक्रम में सुनियोजित तरिके से बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।

मृत्युंजय सिंह

मैं मृत्युंजय सिंह पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र में विभिन्न राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त न्यूज़ सम्प्रेषण के डिजिटल माध्यम से जुडा हूँ.मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की ख़बरों को प्रमुखता से उठाना एवं न्याय दिलाना है.जिसमे आप सभी का सहयोग प्रार्थनीय है.

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