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पांच रुपया के पतंग को लूटने में दर्जनों का फटा सर

बच्चों का विवाद परिजनों मे चली लाठी, युद्ध को देख लगा पतंग बना बहाना




Chandauli news :क़ीमत चुकानी पड़ती है यहाँ यारों,रिश्तों के बाजार मे यहां कुछ नहीं मिलता ” यह चंद लाईन सटीक बैठ रही है सदर कोतवाली के डिग्घी गांव के घटना पर। जहाँ पांच रूपये के पतंग को बच्चों ने लूटा। जिसकी क़ीमत परिजनों खून बहाकर चुकानी पड़ी।


मकर सक्रांति को लेकर जनवरी के पहले सप्ताह से ही बच्चे पतंग बाजी शुरू कर देते है। उन्हें अपने इस खेल मे खाने पीने कि जहाँ फिकर नहीं होती। वहीं किसकी डोर कट रही है वह पतंग कहाँ गिरेगी इसकी निगाह लगाए यह एस कदर निडर हो जाते है कि उसे लूटने के चक्कर मे छत से नीचे कूदने से भी नहीं हिचकते। कुछ ऐसी ही घटना सदर कोतवाली के डिग्घी मे हुआ। जहाँ किसी के पतंग कि डोर कटी और उसे लूटने के लिए दर्जनों कि टोली पीछे दौड़ ली। उसमें से एक ने पतंग पकड़ी तो दूसरे ने उसकी डोर। अब पतंग किसकी को इसके लिए पहले वाक युद्ध हुआ। इससे भी बात नहीं बनी तो द्वन्द युद्ध शुरू हो गया। जिसमें पतंग आकाश में उड़ने के लायक नहीं रह गयी। पतंग के लिए भागदौड़ फिर मारपीट के बाद मायूसी ने ऐसा तूल पकड़ा कि इसमें दोनों पक्ष के परिजन आमने सामने हो गए। बात इस कदर बढ़ी कि बूढ़े जवान औरत सब हाथ में लाठी डंडा लेकर मैदाने जंग में हो लिए। किसी ने यह नहीं कहा कि पांच कि पतंग फ़टी तो फ़टी। बल्कि उस पतंग के लिए दोनों पक्ष से दर्जनों लोग लाठी डंडे के प्रहार से लहूलुहान हो गए। कोई हाथ में प्लास्टर तो कोई सर में टांका व पट्टी बांध के घूम रहा है। दोनों पक्ष केअदावत को देख लग रहा था कि बच्चों का पतंग तो केवल एक बहाना था।

मृत्युंजय सिंह

मैं मृत्युंजय सिंह पिछले कई वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र में विभिन्न राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्रों में कार्य करने के उपरान्त न्यूज़ सम्प्रेषण के डिजिटल माध्यम से जुडा हूँ.मेरा ख़ास उद्देश्य जन सरोकार की ख़बरों को प्रमुखता से उठाना एवं न्याय दिलाना है.जिसमे आप सभी का सहयोग प्रार्थनीय है.

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