किसान संगठन के एक सदस्य के साथ मिलकर सचिव खाद का कर रहा काला बाजारी
एआर कोआपरेटिव के मिली भगत से हर समिति पर अधिक रेट मे मिलती है खाद
शिकायत के बाद एआर प्राइवेट दुकानदारों का शिकायत कराने के लिए सचिव को देते है सुझाव

Chandauli news : गेहूं सिंचाई के लिए किसानों को यूरिया कि जरूरत होने लगी। इधर साधन सहकारी समितियों से यूरिया गायब हो गया। जहाँ यूरिया है वहाँ किसानों कि बजाय ब्यापारियों को बेचने में प्रभारी लगे हुए है। किसान सहकारी समिति कि शिकायत कर दिया तो वहाँ के प्रभारी के पक्ष में एआरकोऑपरेटिव खड़ा हो जा रहे है। जिससे नाराज किसानों ने बृहस्पतिवार को असना के सचिव व किसान संगठन के एक सदस्य को कमरे में बंद कर दिए। इन लोंगो का आरोप है कि सचिव पैसा लेकर 666 बोरी खाद का वितरण कर दिए लेकिन 5 घंटे से लाईन में लगे लोंगो को खाद नही दिया गया। जिससे गुस्साए किसानों ने असना सचिव को बंधक बना लिए सूचना के बाद कंदवा पुलिस पहुंच गयी। वहीं रात्रि 09 बजे के आस पास एआर कोआपरेटिव पहुंचे किसानों से कहाँ कि दो दिन में यूरिया उपलब्ध करायी जाएगी उसके बाद किसान आंदोलन समाप्त किये।
किसानों का आरोप है कि समिति के सचिव सुनील तिवारी ने जलालपुर और सुढना गांव के किसानों को उर्वरक वितरित करने के लिए बुलाया। किसान समिति पर पहुंच कर नंबर लगाकर खाद बांटने का इंतजार करने लगे। इसी दौरान एक किसान संगठन का कथित मंडल प्रवक्ता वहां पहुंच गए और अपने लिस्ट के अनुसार 666 बोरी यूरिया वितरित करा दिया। इससे सुबह से नंबर लगाकर खाद का इंतजार कर रहे जलालपुर के 50 और सुढना के 25 किसान आंदोलित हो गए। किसानों ने सचिव और किसान संगठन के पदाधिकारी को बंधक बना दिया। सचिव के बंधक बनाये जाने पर पहुंची कंदवा पुलिस ने लोंगो से सचिव को मुक्त कराने के लिए दरवाजा खोलवाया वैसे ही संगठन के पदाधिकारी भाग खडे हुए।
क्रय केंद्र के चयन में भी एआर कि भूमिका संदिग्ध : एआर कोऑपरेटिव कि भूमिका खाद कि काला बाजारी से लेकर धान खरीद तक संदिग्ध है। किसानों के धान खरीद के लिए जो केंद्र बनाये गया है यह मानक के विपरीत अधिकांश केंद्र मिलरों को दे दिया गया है। जहाँ किसानों से धान खरीदने कि बजाय मिलरों के माध्यम से धान कि खरीद हो रही है।